तरण ताल का मरण
एक बार पहले भी मैं कुस्सू जी के घर गया था। जाते ही हाथ पकड़ कर भीतर ले गए चलो अपना मकान दिखाता हूँ। क्या आलीशान बंगला है उनका। देखो तो देखते रह जाओ। ड्राइंग रूम जैसे किसी होटल का स्वागत कक्ष हो दो दो बड़े व सुन्दर सोफ़ा सेट, खाने की बड़ी मेज, छत से लटकी झूमर, पांच बड़े शयन कक्ष, तीन के साथ सलग्न स्नान घर जिनमे स्नान टब लगे तथा शीशे की कोठरी में फव्वारा साथ ही प्रत्येक नल से गरम, ठन्डे पानी की व्यवस्था। इनके अतिरिक्त एक और स्नान गृह व लॉण्डरी अलग जिसमे स्वचालित धुलाई व सुखाने की मशीन लगी थी। ड्राइंग रूम के एक भाग में बार बना रखा था। देश, विदेश की अनेकों ब्रांड की बोतलें सजी थी। मुझसे पूछा, "स्कॉच लोगे या व्हिस्की? कौन सा ब्रांड?"
मैंने कहा, "नहीं, जूस ठीक है।"
"अच्छा चलो अपना स्विमिंग पूल दिखाता हूँ। "
घर के पीछे सुन्दर उद्यान बना रखा था और बीच में तरण ताल। तट पर बेंत वाले सोफे रखे थे। आभा देखकर मैं स्वयं को रोक नहीं पाया, सोफे पर बैठ गया। कुस्सू जी भी बगल में बैठे।
"चलो, यहीं जलपान करते हैं। " मैंने भी हामी भर दी।
नौकरी पेशे वाले का इतना बड़ा ठाट। देख कर मैं तो दंग रह गया। भारत में तो बड़े पैसे वाले ही इस तरह की सुविधा का उपभोग कर सकते हैं।
तरण ताल देख कर मेरा मन भी ललच गया। काश! हम भी थोड़ी देर इसमे छपक, छपक कर लेते, मगर मेहमान बन कर गए थे अतः मन का भाव मन में छुपा के ही रखना पड़ा। कुस्सू जी बड़े उत्साह से सब बताते रहे। क्या भारत में आप लोग सोच सकते हैं घर के प्रांगण में स्विमिंग पूल। यह तो अभी छोटा है यहाँ लोग इससे बड़े बड़े स्विमिंग पूल भी रखते हैं, मैंने इतना ही बड़ा बनवाया था क्योंकि इसका रख रखाव सरल नहीं है। पानी बदलना, रसायन डालना आदि नियमित रूप से करना पड़ता है। स्विमिंग पूल रखना थोड़ा झंझट वाला काम है।
यह सब देख कर थोड़ी देर तो मन सपनों में घूमने लगा, काश! मेरे भी घर में स्विमिंग पूल होता तो घंटों उसी में समय बिताता। वास्तव में मुझे कभी स्विमिंग पूल में प्रवेश का अवसर नहीं मिला था। हाँ, कभी कभार गांव के तालाब में या फिर गंगा जी में डूबकी अवश्य लगाई थी। शीघ्र ही मन को समझा लिया जो आनंद मैंने ट्यूबवेल में स्नान करके उठा लिया इन लोगों के लिए कहाँ संभव। नलकूप के हौद में बैठे और ऊपर से जल की मोटी धार, खुले वातावरण में मानो बहता झरना ऊपर गिर रहा हो, स्वर्ग में स्नान करने की अनुभूति। जब भी मुझे गांव जाने का अवसर प्राप्त होता था मैं चांपा कल (हैंड पंप) पर नहीं बल्कि ट्यूबवैल पर ही स्नान करना पसंद करता था। न पानी बदलने का झंझट, न रसायन डालने का। हर बार बिना शुल्क के ताजे पानी से स्नान। सिंचाई के लिए तो टुबवेल चलना ही होता है।
इस बार कुस्सू जी सहज अनुभव नहीं कर रहे थे। अभी बैठे ही थे की उनका फ़ोन आ गया, वे उठकर बात करने एक और चले गए। थोड़ी देर में जब आये तो उनके मुख पर चिंता की रेखाएं झलक रही थीं। चाय पानी का दौर समाप्त हुआ। मैंने उनसे आग्रह किया, "चलो आपका स्विमिंग पूल देखें। "
"क्या देखेंगे स्विमिंग पूल!" वे बोले।
वे लेकर गए तो पर अनमने ही देखा तो उनका तरण ताल अकाल के समय प्यासी धरती की भांति सूखा पड़ा था। जो उद्यान हरी भरी घास व पुष्प के पौधों से सजा होता था अब टाईलों से ढका पड़ा है। बस कहीं कहीं एकाध सजावट के पौधे रह गए थे।
"यह क्या हुआ कुस्सू जी! स्विमिंग पूल सूखा ?" मैंने पूछा।
"अरे क्या बताएं यहाँ के नियम इतने सख्त हैं की झेलना बहुत कठिन है। लॉन की घास बढ़ गयी तो अर्थ दंड, स्विमिंग पूल का पानी न बदला तो जुर्माना, नमक व रसायन न डाला तो जुर्माना। रख रखाव में ही कई सौ डॉलर हर महीने डकार जाता है। इतना परिश्रम व खर्च करते हैं और ऊपर से कई बार जुर्माना भरना पड़ चुका है। अभी हाल ही में एक हजार डॉलर का जुर्माना आया था। अब तो सोच रहा हूँ कि स्विमिंग पूल को पटवा ही दूँ। इससे अच्छा तो किसी क्लब के स्विमिंग पूल चले जाया करेंगे। कौन सा की प्रतिदिन स्विमिंग पूल में तैरते हैं। वही, ठेकेदार का फ़ोन आया था। उससे पाटने के लिए बात किया था। १२ हजार डॉलर मांग रहा है (भारत के हिसाब से लगभग ७ लाख रुपये) । बताईये पाटने के लिए इतना पैसा, इतना तो बनवाने में भी नहीं लगा। "
कुस्सू जी की चिंता को मैं भली तरह से अनुभव कर रहा था, मैंने भी उनकी बात को हाँ करके समर्थन दे दिया।
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