Friday, 3 July 2015

Second hand bed

पुराना पलंग
'और विवेक कैसे  हाल हैं।  इधर कैसे ? कहाँ बिजी हो गए ? काफी समय हो गया, मिले ही नहीं।'
'बस, ऐसे ही, कोई खास नहीं।  अभी कुछ मेहमान सिडनी आये हुए हैं।  थोड़ा उन्हें घुमाना फिराना है। अभी एक बेड रूम में मैट्रेस नीचे ही रखा है, आइकिया जा रहा था, सोचा एक बेड डाल दूँ।  वो लोग भी सोच रहे होंगे, नीचे सुला रहा है ।'

'अरे मेरा एक मित्र अपना डबल बेड निकालना चाह रहा है, उसे ही क्यों नहीं ले लेता, एक तिहाई से भी कम दाम  में मिल जायेगा। मेरे परिचित का ही है, मैंने उसे देखा है बहुत अच्छा और मजबूत है। वही एजेंसी वाले ले जायेंगे, पोलिश वालिश करके नया बनाकर बेच देंगे।  कहे तो बात कर लू।'  पंकज ने कहा।

विवेक को बात कुछ अटपटी लगी।  पुरानी ही खरीदनी हो तो शहर का एक चक्कर लगाएं, कहीं न कहीं पटरी पर रखी वैसे ही मिल जाएगी।  यहाँ पुरानी वस्तुएं बिकती तो हैं नहीं, वैसे ही घर के बाहर छोड़ना पड़ता है, म्युनिसिपालिटी की गाड़ी आती है उठा ले जाती है। उसे यह बात अपमान वाली लगी।

पंकज ने समझाया, 'वह बेड उसके किसी बहुत घनिष्ठ मित्र का ही है।  लेन देन की बात का किसी के कानोकान तक खबर नहीं होगी।'
विवेक की पत्नी ने भी इस बात का समर्थन दे दिया, चलो अभी उसे ही लेकर काम चला लेते है, फिर थोड़ा फुर्सत से अच्छा सा बेड खरीदेंगे। 

विवेक बोला, 'ठीक है बात कर ले, पर एक दो दिन में ही लेना है। और हाँ एक शर्त है मै उसके पास नहीं जाऊंगा और किसी को पता भी नहीं लगना चाहिए कि सेकंड हैंड बेड खरीदा हूँ।'

'अच्छा, कल मेरी छुट्टी है, तुम पैसे दे देना, मै लेकर तुम्हारे यहाँ भिजवा दूंगा।'

'हाँ, उसके यहाँ से उठाकर सीधे कारपेंटर शॉप ले जाना है, वहां थोड़ा पोलिश करवा लेंगे नया जैसा हो जायेगा।'

'बिलकुल ठीक, वहां से लेकर मैं फ़ोन करूंगा।  तुम कारपेंटर शॉप पर मिल जाना।'

अगले दिन पंकज का फ़ोन आता है। विवेक, मैंने वो बेड ले लिया है।  एक घंटे बाद कारपेंटर शॉप पर आ जाना।
विवेक अपनी पत्नी के साथ वहां पहुंचा। बेड डिस्मेन्टल और काफी अच्छी कंडीशन में था। विवेक ने शॉप के मालिक से उस पर पोलिश करने के लिए बोला।  उसने अगले दिन देने के लिए कहा तो विवेक ने उससे रिक्वेस्ट किया थोड़ा जल्दी करके एक दो घंटे में इस पर पोलिश मार के तैयार करवा दो। मेरे घर मेहमान आये हैं, उन्हें नीचे सोना पड़ रहा है।  मुझे आज शाम तक इसे घर ले जाना है।
घर लाकर रात ही रात उसे अस्सेम्बल करके तैयार कर लिया।  पोलिश के बाद तो एकदम नया सा ही लग रहा था। कोई नहीं कह सकता था कि वह सेकंड हैंड बेड होगा।
विवेक की पत्नी ने उसमे एक चिन्ह देखकर विस्मित रह गयी।
विवेक, विवेक! देखो, यह निशान।  याद है ऐसा ही निशान उस बेड में था जो हमने आशु को दिया था।
मुझे तो  ठीक से याद नहीं, हो सकता संयोग वश उस तरह का चिन्ह हो।  पर उस बेड का रंग इतना गहरा तो नहीं था।  संभवतः इसने भी उसी कंपनी से खरीदा होगा।  हाँ, देखो आईकिया का लेबल लगा है।

आशु जब इंडिया से ऑस्ट्रेलिया में नया नया आया था तो विवेक ने उसकी बहुत मदद की थी।  घर में पड़ी कुछ अतिरिक्त वस्तुएं उसे ऐसे ही दे दिया था।  उसके पास एक बेड भी अतिरिक्त रखा था जिसे वह आशु को दे दिया था। तब उसे इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी।

वीक एंड पर आशु भी विवेक के घर आ धमका। अधिकतर वीक एंड पर  समूह के सभी मित्र किसी न किसी बहाने मिल लेते थे।  कभी कहीं आउटिंग पर निकल गए, कभी किसी ने खाने पर बुला लिया वरना वैसे ही किसी के घर आ धमके । इन सब क्रियाओं से प्रेम परस्पर खूब बढ़ चढ़ कर था।
हाल चाल हुआ।
विवेक  - 'मैंने नया बेड लिया है '
आशु - 'अच्छा, कौन से रूम में है'
 आ देख
सभी बेड रूम में घुसे
आशु की पत्नी - अरे, यह तो वही बेड है जो हमने तीन चार दिन पहले बेचा था
विवेक - 'किसको बेचा था'
आशु की पत्नी - यह तो पता नहीं, खरीदने वाला तो सामने नहीं आया पर पंकज ने लेकर किसी को दिया था।
विवेक - हा, हा हमने भी नया नहीं खरीदा, सेकंड हैंड ही खरीदा और वह भी पंकज के ही द्वारा ।  हाँ, उसे पोलिश जरूर करवा दिया था।
सुनकर तो आशु को जैसे काठ मार गया।  वह शर्म से पानी पानी हो गया।
यह तो वही बेड है जो तूने मुझे दिया था, मुझे क्या पता पंकज यहीं के लिए यह सब कर रहा है।
तू अपने पैसे वापस ले लेना।
विवेक बोला जाने दे, कोई बात नहीं, जो हो गया, सो हो गया। चल चाय पीते हैं।


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