Monday, 29 August 2016

Hileri ka kutta

कुत्ता लेकर आ जाती

हार्दिक के घर से दो तीन घर छोड़ कर हिलेरी का घर था।  बूढी हिलेरी अपने पति के साथ यहाँ रहती थी। हिलेरी एक सुन्दर महिला थी; बदन से पूरी तरह चुस्त-तंदरुस्त, रुई सा सफेद,  लड़कों जैसे छोटे बाल, उम्र पचहत्तर के पार। पैंट टी शर्ट पहन कर चलती थी तो लगता था कि अपने जमाने की कोई नायिका रही होगी। चेहरे पर झुर्रियां अवश्य थीं वरना आव भाव से उम्र की झलक नहीं दिखती। बेटी-दामाद, सिडनी से दूर कैनबरा में रहते थे।  वे महीने में एकाध बार मिलने आ जाते और कभी कभी हिलेरी उनके यहाँ चली जाती । 
हिलेरी का श्वेत रंग का झब्बर बाल वाला कुत्ता, जिसका नाम मेग्जी था, देखने में बड़ा प्यारा था। हिलेरी के पति अधिकतर समय अपने घर के लान में फूल पौधे उगाने व उनके रख रखाव में लगे रहते और वह स्वयं कुत्ते की देख रेख में व्यस्त रहती।  मेग्जी को नहलाने, खिलाने और टहलाने में उसका काफी समय व्यतीत हो जाता। जब वह मेग्जी को टहलाने के लिये निकलती तो हार्दिक का डेढ़ साल का बेटा, चिंतन देखते ही घर से बाहर निकल जाता और मेग्जी साथ खेलने के लिए मचल उठता।  हिलेरी यह देख कर बड़ा प्रसन्न होती। वह चिंतन का हाथ पकड़ कर कुत्ते की पीठ पर फिरवाती। चिंतन मेग्जी को छूकर बड़ा रोमांचित होता। कुछ देर पश्चात् जब वह वापस जाने लगती तो चिंतन रोने लगता, तथा उसके साथ और खेलने के लिए जिद्द करता। हार्दिक उसे बड़ी मुश्किल से बहला फुसला कर घर लाता।  
चिंतन का तो अब मेग्जी से इतना लगाव हो गया था कि बार बार हार्दिक का हाथ पकड़ कर हिलेरी के घर की ओर ले जाता। घर के सामने से निकलते, हिलेरी भी जब खिड़की से चिंतन को देख लेती तो मेग्जी को लेकर बाहर आ जाती और चिंतन उसके साथ खेलने लगता। हार्दिक सोचता कि उधर जाने से, इस उम्र में हिलेरी अनायास ही तंग होती है, इसलिए उसके घर की ओर चिंतन को लेकर जाना उसे अटपटा लगता और कम से कम जाता। पर हिलेरी को, चिंतन का मेग्जी के साथ खेलना देख बहुत अच्छा लगता था। वह जब भी मेग्जी को टहलाने ले जाती कुछ देर हार्दिक के घर के सामने खड़ी हो जाती ताकि चिंतन आकर कुछ देर खेल ले और वह उसके नटखटपना का आनंद ले सके। चिंतन खिड़की से  देख लेता और चिल्लाने लगता 'डौगी, डौगी  .. ' हार्दिक विवश होकर उसे बाहर ले जाता और चिंतन उसके साथ खेलने लगता। कभी कभी चिंतन सोया होता और कुछ क्षण प्रतीक्षा के पश्चात भी बाहर नहीं निकलता तो हिलेरी उदास होकर चली जाती।
चिंतन को मेग्जी से इतना लगाव हो गया था कि वह बार बार उसके पास जाने की जिद्द करता। कई बार वह कुत्ते का अभिनय तक करता, कुत्ते जैसे चार पैरों पर चलता और भौं भौं करता। यहाँ तक कि कई बार तो सपने में भी 'डॉगी, डॉगी' चिल्लाता। चिंतन जब भी किसी बात के लिए जिद्द करता तो हार्दिक और उसकी पत्नी 'देखो, डॉगी!' कहकर उसको मना लेते। जैसे ही वे कहते- डॉगी आ गया, चिंतन भाग कर खिड़की से झांकने लगता।कुत्ते और चिंतन की दोस्ती ने दोनों परिवारों में भी घनिष्ठता बढ़ा दी थी। लगभग रोजाना ही हिलेरी और हार्दिक एक दूसरे का हाल पूछ लेते। 

इधर कुछ समय से हिलेरी कुत्ता लेकर नहीं आ रही थी। चिंतन बार-बार खिड़की से देखता, शायद उसे वह डॉगी दिख जाय पर मेग्जी के दर्शन नहीं हो पाते। अब कोई भी कुत्ता उसके घर के सामने से गुजरता, चिंतन रोमांचित होकर चिल्लाने लगता 'डॉगी, डॉगी।'  कई बार हार्दिक, चिंतन को लेकर हेलेरी के घर के सामने तक गया पर वहां सन्नाटा पसरा था। यहाँ तक कि उसके लान की घास भी सूखने लगी थी। उसने अनुमान लगा लिया, संभवतः वह अपनी बेटी यहाँ कैनबेरा गयी होगी। धीरे, धीरे महीना से ऊपर हो गया। एक दिन जब हार्दिक उधर गया तो हिलेरी के पति जान, लान की सिंचाई करते दिख गए। हार्दिक ने उन्हें बताया कि चिंतन मेग्जी को बहुत याद करता है, दिन में कई बार 'डॉगी डॉगी ' करता है और कभी कभी  तो दौड़ कर आपके दरवाजे तक आ जाता है। जान ने बताया कि अब वह मेग्जी से नहीं मिल पायेगा।
हार्दिक यह सुनकर चौंका, 'क्यों? उसे कुछ हो गया, क्या?'
'नहीं, वह ठीक है पर अब कैनबेरा में बेटी के पास ही रहेगा। हिलेरी का हृदयघात के कारण स्वर्गवास हो गया।  मेग्जी की देखभाल मेरे वश की तो है नहीं। '
अब चिंतन को फुसलाना उनके लिए बड़ा कठिन कार्य था।

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