Sunday, 5 August 2018

Tumhare geet


तुम्हारे गीत

शब्दों को बना तुमने, पानी बहा दिया।
जी भर के फुहारों में, हमने नहा लिया। 

घुंघरू से बजते हैं गीतों में वो ढलकर।
घुल जाते हैं कानों में, मिश्री से सुनकर। 
रोते अकेले में दिलों को चहचहा दिया। 
शब्दों को बना तुमने, पानी बहा दिया।

शब्दों को तेरे जादू कहूं या कि गुलदस्ता।
गीतों का चमन सारा, उन्हीं से है महकता।
खोल शीशी इत्र की, नगमों की हवा दिया।  
शब्दों को बना तुमने, पानी बहा दिया। 

नगमों का तेरे दिल ये, कबसे है मतवाला।
बना दिया गीतों के उपवन को मधुशाला।
दिल हो गया नशे में ज्यूँ मदिरा बहा दिया। 

शब्दों को बना तुमने, पानी बहा दिया।

गीतों को दुखी करके, तुम चले किस सफर पे।  
बहुत रो रहे वो किन्हीं आवाजों में घुल के। 
तारों के साथ तुमने, हवाओं को रुला दिया।
शब्दों को बना तुमने, पानी बहा दिया।






तुम गए हो जबसे

वीरानी सी छायी मन में,
फूल खिले नहीं चमन में।
तुम गए हो जबसे  ...

मुरझाई सी बैठी रहती है,
पूछो तो कुछ ना कहती है,
मैना गाती नहीं उपवन में।
तुम गए हो जबसे  ...

आकर चले गए बादल,
ललचाये होकर के श्यामल,
पर बरसे नहीं सावन में।
तुम गए हो जबसे  ...

चाँद मध्धम सा दिखता है,
रात का कालापन डंसता है,
तारे भी धूमिल गगन में।
तुम गए हो जबसे  ...


No comments:

Post a Comment