जीने भी दोगे ?
झुम्मन मिया के घर यह तीसरी बार डकैती पड़ी थी। शुक्र है कि तीनों ही बार कोई खून खराबा नहीं हुआ, बस सामान ही गया। झुम्मन मिया ने डाकुओं से कोई तकरार नहीं किया। सामान तो लुट जाने का झुम्मन मिया को कोई गम नहीं था, वे इस बात से संतुष्ट थे कि डाकुओं ने कोई शारिरिक हानि नहीं पहुंचाई थी। जान बची तो लाखों पाये। घर में खाने पीने के लिए अनाज वगैरह की कोई कमी नहीं थी। अल्ला ने बहुत दे रख था। और उनको पूरा भरोसा था कि वह आगे भी देता ही रहेगा। खेत तो थोड़ा ही था, पर खाने भर को पैदा कर लेते थे। एकाध बकरी और कुछ मुर्गियां दरवाजे पर हमेशा रहती थीं। वे अल्ला के बड़े शुक्रगुजार थे। छोटे भाई मुनव्वर को दरजी की दुकान करा रखी थी। दरजी की दुकान से भी वह ठीक ठाक कमा लेता था। दोनों भाईयों में बड़ा प्रेम था। दोनों मिल जुल कर परिवार चलाते थे। मुनव्वर के तो दो बेटियां ही थीं। वह ज्यादा चिंता नहीं करता, कहता था, अल्ला का बड़ा रहम है, 'ये दो बेटियां हैं इनकी निकाह कर दूंगा, छुट्टी हो जाएगी।' झुम्मन मियां के दो बेटे और एक बेटी थी। उनका सपना था कि वे बेटों, सलीम और कमाल को छोटे मोटे काम में नहीं लगाएंगे बल्कि पढ़ा लिखा कर कोई अफसर बनाएंगे।
झुम्मन मिया के घर यह तीसरी बार डकैती पड़ी थी। शुक्र है कि तीनों ही बार कोई खून खराबा नहीं हुआ, बस सामान ही गया। झुम्मन मिया ने डाकुओं से कोई तकरार नहीं किया। सामान तो लुट जाने का झुम्मन मिया को कोई गम नहीं था, वे इस बात से संतुष्ट थे कि डाकुओं ने कोई शारिरिक हानि नहीं पहुंचाई थी। जान बची तो लाखों पाये। घर में खाने पीने के लिए अनाज वगैरह की कोई कमी नहीं थी। अल्ला ने बहुत दे रख था। और उनको पूरा भरोसा था कि वह आगे भी देता ही रहेगा। खेत तो थोड़ा ही था, पर खाने भर को पैदा कर लेते थे। एकाध बकरी और कुछ मुर्गियां दरवाजे पर हमेशा रहती थीं। वे अल्ला के बड़े शुक्रगुजार थे। छोटे भाई मुनव्वर को दरजी की दुकान करा रखी थी। दरजी की दुकान से भी वह ठीक ठाक कमा लेता था। दोनों भाईयों में बड़ा प्रेम था। दोनों मिल जुल कर परिवार चलाते थे। मुनव्वर के तो दो बेटियां ही थीं। वह ज्यादा चिंता नहीं करता, कहता था, अल्ला का बड़ा रहम है, 'ये दो बेटियां हैं इनकी निकाह कर दूंगा, छुट्टी हो जाएगी।' झुम्मन मियां के दो बेटे और एक बेटी थी। उनका सपना था कि वे बेटों, सलीम और कमाल को छोटे मोटे काम में नहीं लगाएंगे बल्कि पढ़ा लिखा कर कोई अफसर बनाएंगे।
झुम्मन मिया की जिंदगी बड़ी सादगी और भाई चारे के साथ बीत रही थी। जो कोई भी इनके द्वार से गुजरता या वे जिसके दरवाजे से गुजरते, दुआ सलाम जरूर हो जाती। गांव घर में उनकी बड़ी इज्जत थी। पढ़ाई लिखाई के बारे में उन्हें ज्यादा कुछ पता नहीं था, बारहवीं के बाद दोनों बेटों को ही पोलेटेक्निक करा दिया। सोचे, टेक्निकल रहेंगे, जल्दी नौकरी मिल जाएगी; और हुआ भी वही। दोनों की ही एक बड़ी कंपनी में नौकरी लग गयी। चूकि कंपनी का काम अरब देशों में भी चल रहा था, सलीम और कलाम को दुबई भेज दिया गया। इससे पूरा परिवार खुश था विदेश चले जाने से आमदनी अच्छी हो गयी।
दोनों बेटे खूब पैसे कमाते और इंडिया भी भेजते। झुम्मन मियां ने आलीशान मकान बनवा लिया। अब तो क्षेत्र में उनके जैसा संपन्न कोई भी नहीं था। उनके रहन सहन और मकान का आस पास के लोगों की आँखों में चुभना स्वाभाविक था। एकाध कोस में उनके जैसा किसी का मकान नहीं था। मुनव्वर की दोनों बेटियों की धूम धाम से शादी हो चुकी थी। झुम्मन मिया की बिटिया सलमा अभी छोटी थी। उन्होंने निश्चय किया था, सलमा की शादी ऐसी करेंगे कि दुनिया देखेगी।
दोनों बेटे खूब पैसे कमाते और इंडिया भी भेजते। झुम्मन मियां ने आलीशान मकान बनवा लिया। अब तो क्षेत्र में उनके जैसा संपन्न कोई भी नहीं था। उनके रहन सहन और मकान का आस पास के लोगों की आँखों में चुभना स्वाभाविक था। एकाध कोस में उनके जैसा किसी का मकान नहीं था। मुनव्वर की दोनों बेटियों की धूम धाम से शादी हो चुकी थी। झुम्मन मिया की बिटिया सलमा अभी छोटी थी। उन्होंने निश्चय किया था, सलमा की शादी ऐसी करेंगे कि दुनिया देखेगी।
लोग मुंह पर बहुत प्रशंसा करते, पर मन ही मन जलते थे। पता नहीं किसकी बुरी नजर लगी, झुम्मन मियां के घर डाकुओं ने धावा बोल दिया। डाकू, घर का सारा कीमती सामान लूट ले गए। झुम्मन की बीबी रो रोकर पागल हो रही थी। मियां ने समझाया, जान बची तो लाखों पाए, सामान ही तो गया है, फिर आ जायेगा। पुलिस में रिपोर्ट किया गया। पुलिस वाले झुम्मन से कहते, 'किसी पर शक हो तो बताओ।' झुम्मन मियां किसका नाम लेते। नतीजा कि डाकू पकड़े नहीं गए, न ही उनका सामान मिला।
सबको पता था, इनके यहाँ अरब से पैसा आता है। उत्सव त्यौहार में चंदा माँगने वाले भी आते तो ये खुले हाथ से देते। फिर भी इनके दुश्मन हो जायेंगे, सोच से भी परे था। लोगों के जलन के कारण उन्हें यह दिन देखना पड़ा या कि बेटों के बाहर होने से इन्हें सभी कमजोर समझते थे। खैर झुम्मन की यह स्थिति ज्यादा दिन तक नहीं रही। थोड़े ही समय में फिर से सारा सामान बना लिए। चार पांच साल बीते कि एक बार फिर डाकुओं का दल आ धमका। पिछली बार सबक लेकर झुम्मन ने कुछ सामान इधर उधर रख लिया था, इस कारण इस बार कम नुकसान हुआ। पिछली बार झुम्मन मियां ने पुलिस वालों को खूब सुनाया था। इस बार भी पुलिस का वही राग था, 'क्या हम एक एक घर में पुलिस लगाएंगे? किसी पर शक हो तो बताओ। ' कहकर पल्ला झाड़ लिए।
बेटों ने झुम्मन को बहुत समझाया, गांव छोड़कर शहर में मकान बना लो, यहाँ देहात में सुरक्षा नाम की कोई चीज नहीं। पुलिस वाले तो सीधे सादे लोगों को ही तंग करते हैं। यहाँ आलीशान मकान लेकर क्या करेंगे जब शांति और सुरक्षा ही नहीं। उन्होंने चाचा मुनव्वर से भी उन्हें समझाने का आग्रह किया। लाख समझाने पर भी झुम्मन मिया पुरखों की जगह छोड़ने को तैयार नहीं होते।
बेटों ने झुम्मन को बहुत समझाया, गांव छोड़कर शहर में मकान बना लो, यहाँ देहात में सुरक्षा नाम की कोई चीज नहीं। पुलिस वाले तो सीधे सादे लोगों को ही तंग करते हैं। यहाँ आलीशान मकान लेकर क्या करेंगे जब शांति और सुरक्षा ही नहीं। उन्होंने चाचा मुनव्वर से भी उन्हें समझाने का आग्रह किया। लाख समझाने पर भी झुम्मन मिया पुरखों की जगह छोड़ने को तैयार नहीं होते।
झुम्मन मिया ने सलमा की शादी तय कर दी। शादी के अब कुछ दिन ही बाकी हैं। शादी के लिए सामान खरीदने की तैयारी जोरों पर है। गहने वगैरह बन चुके हैं। झुम्मन मिया के यहाँ चहल पहल होने लगी है। गांव के लोग आकर काम धाम के बारे में पूछ जाते। टेंट वगैरह का बयाना बट्टा हो चुका है। बस दो दिन बाद ही सलीम और कमाल भी आने वाले हैं। मियां जी का तो जोश देखते ही बनता है। गांव वाले भी अच्छी दावत की उम्मीद लगाए बड़े प्रसन्न हैं। झुम्मन मियां सबसे सहयोग का आग्रह करते, सबकी भूमिका तय करने में लगे हैं। बारातियों के स्वागत और खान पान में कोई कमी नहीं हो, इसके लिए मुनव्वर और अपनी पत्नी से राय मशविरा कर चुके हैं।
बारात आने के अब दो ही दिन बाकी हैं। आज रात अचानक ही घर में हो हल्ला शुरू हो जाता है, 'डाकू आ गए, डाकू आ गए।'
इस बार झुम्मन मिया ने बड़ी समझदारी से काम लिया था। उन्हें पता था कि शादी व्याह का घर है, उन्हें इस परिस्थिति का अंदेशा पहले ही था। झुम्मन मिया का घर गांव के एक ओर है, उन्होंने गांव वालों को आगाह कर रखा था और गहने आदि किसी रिश्तेदार के यहाँ रखवा दिया था। शोर सुनते ही, गांव वाले लाठी बन्दूक लेकर दौड़े आ गए। झुम्मन ने अपने एक रिश्तेदार, जिसके पास बंदूक का लाइसेंस था, पहले ही बुला रखा था। उसने भी हवाई फायर कर दिया। डाकुओं के हाथ कुछ भी नहीं लगा, वे सिर पर पैर रख कर भागे। सलमा ने हिम्मत करके एक डाकू का पांव पकड़ लिया, मगर वह उसकी पीठ पर बंदूक का कुंदा मारकर खुद को छुड़ा लिया और भागने में सफल हो गया।
इस बार गांव वालों का सहयोग देखकर, झुम्मन की हिम्मत और बढ़ गयी। वे पहले से अधिक सावधान हो चुके थे इस कारण अब डाकुओं का अधिक भय नहीं था। मरते दम तक अपनी पुश्तैनी जमीन नहीं छोड़ने का उनका अडिग फैसला था, वैसे उन्होंने शहर में भी एक मकान बनवा लिया था।
बारात आने के अब दो ही दिन बाकी हैं। आज रात अचानक ही घर में हो हल्ला शुरू हो जाता है, 'डाकू आ गए, डाकू आ गए।'
इस बार झुम्मन मिया ने बड़ी समझदारी से काम लिया था। उन्हें पता था कि शादी व्याह का घर है, उन्हें इस परिस्थिति का अंदेशा पहले ही था। झुम्मन मिया का घर गांव के एक ओर है, उन्होंने गांव वालों को आगाह कर रखा था और गहने आदि किसी रिश्तेदार के यहाँ रखवा दिया था। शोर सुनते ही, गांव वाले लाठी बन्दूक लेकर दौड़े आ गए। झुम्मन ने अपने एक रिश्तेदार, जिसके पास बंदूक का लाइसेंस था, पहले ही बुला रखा था। उसने भी हवाई फायर कर दिया। डाकुओं के हाथ कुछ भी नहीं लगा, वे सिर पर पैर रख कर भागे। सलमा ने हिम्मत करके एक डाकू का पांव पकड़ लिया, मगर वह उसकी पीठ पर बंदूक का कुंदा मारकर खुद को छुड़ा लिया और भागने में सफल हो गया।
इस बार गांव वालों का सहयोग देखकर, झुम्मन की हिम्मत और बढ़ गयी। वे पहले से अधिक सावधान हो चुके थे इस कारण अब डाकुओं का अधिक भय नहीं था। मरते दम तक अपनी पुश्तैनी जमीन नहीं छोड़ने का उनका अडिग फैसला था, वैसे उन्होंने शहर में भी एक मकान बनवा लिया था।
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