शीशी में भूत
गुड्डू अपनी उलटी पुलटी हरकतों से घर वालों को परेशान कर रखा था। कभी आधी रात को खाना मांगना, कभी कपडे खोल देना, कभी बत्ती बंद कर देना, किसी को कुछ भी कह देना। अभी कुछ ही दिनों से यह सब चल रहा था, पहले ऐसा कुछ भी न था। महीने भर पहले तो एक दम ठीक ठाक था, अचानक ही उसे जाने क्या हो गया। उसे कोई मानसिक रोग भी नहीं था। परेशान, घर वाले उसे एक बड़े बाबा के पास ले गये। बाबा को पता लगाने में जरा भी देर नहीं लगी कि उसे भूत पकड़ लिया है। भूत से छुटकारा दिलाने के लिए बाबा ने पूजा का उपाय और ढेर सारा खर्च बता दिया।
शर्मा जी, जो एक सरकारी विभाग में अधिकारी थे, उनका गुड्डू के आना जाना था। एक दिन शर्मा जी गुड्डू के घर पहुंचे तो गुड्डू उन्हें घूरकर देखने लगा। उसकी बड़ी बड़ी और लाल ऑंखें देख कर शर्मा जी को डर गए पर उन्होंने अपने को सम्भालते हुए बोला 'तेरी आँखों में क्या हुआ है, गुड्डू ! ' कड़क आवाज सुनकर थोड़ा वह सहमा और पलक झपका लिया। तभी गुड्डू के पापा उन्हें खींच कर एक ओर ले गये और गुड्डू को भूत पकड़ने की बात बताई। शर्मा जी ने भूत की बात सुनकर आश्चर्य व्यक्त किया, 'दिल्ली में रहकर आप लोग भूत प्रेत में विस्वास करते हैं। बताईये, यह कहां कहां उठता बैठता है। '
गुड्डू के पिता ने बताया, एक मोटर मैकेनिक सामू है उसी के पास जाता है और अधिक समय बिताता है। शायद इंजिन विंजन का काम सीख रहा है।
'ठीक, पता करिये कि वह मेकैनिक नशा तो नहीं करता। '
'हाँ, पता करते हैं। ' गुड्डू के पापा बोले।अगले दिन शर्मा जी गुड्डू का हाल चाल लेने फिर पहुंचे।
गुड्डू के पापा, उनके पहुंचते ही एक शीशी लेकर आये जिसमे कोई भूरे रंग का चिपचिपा पदार्थ था । 'ये देखिये, गुड्डू की पैंट की जेब मिला। '
शर्मा जी का शक पक्का हो गया, शायद यही वह भूत है। बोले, 'अब इसे नशा उन्मूलन केंद्र ले जाने की आवश्यकता है। इसका इलाज बाबा के पास नहीं, वहां है। कल सुबह मैं गाड़ी लेकर आता हूँ, इसे ले चलते हैं। मगर इसके अगल बगल दो लोगों को बैठना होगा ताकि गाड़ी चलाते समय कोई हरकत न कर बैठे। '
शीशी में कौन सा भूत था, गुड्डू के पापा इसकी तो जाँच नहीं कराये पर नशा उन्मूलन केंद्र मेंछः माह तक लगातार इलाज कराये। गुड्डू पूर्णतः होकर पापा के काम में हाथ बटाने लगा।
- एस० डी० तिवारी
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