सन्नो की पाँखें
सन्नो को कभी गुमान भी न था कि वह भी हवाई जहाज में बैठेगी। बेटियों के प्यार ने उसे इतना कुछ दिया कि बखान करते नहीं अघाती। दोनों बेटियां कितनी अच्छी नौकरी करती हैं और बड़ी मम्मी का भरपूर ख्याल। बड़ी बेटी, स्वीटी सरकारी अस्प्ताल में नर्स है और छोटी, मीठी स्कूल में अध्यापिका। स्वीटी का बहुत दिनों से एक सपना था कि वह अपनी कमाई से बड़ी मम्मी को एक बार हवाई जहाज में घुमाएगी। मगर हवाई जहाज का किराया सुनकर, उसे दूर की कौड़ी लगती । पड़ोस में विजेंदर मास्टर रहते थे। वे गांव वालों को देश दुनिया की नई बातें बताते रहते थे। एक दिन घर के सामने से गुजर रहे थे, स्वीटी ने मास्टर जी से पूछ लिया, 'मास्टर जी! मुंबई का हवाई जहाज का किराया कितना होगा ?' मास्टर जी ने बताया कि अभी कल ही अख़बार में पढ़ा था आजकल किराए में विशेष छूट चल रही है। एक एयरलाइन्स लखनऊ से मुंबई का हवाई टिकट साढ़े तीन हजार में दे रही है। बस फिर क्या था, स्वीटी के लिए मन मांगी मुराद। मौसी के यहाँ मुंबई जाने की योजना बन ही रही थी । स्वीटी ने घर में जाकर कहा, 'बड़ी मम्मी! इस बार मुंबई हम, हवाई जहाज से चलेंगे। ' बड़ी मम्मी बोलीं, 'नहीं, नहीं, बहुत पैसा लगेगा, अभी तुम दोनों की शादी करनी है।' फालतू के कामों में पैसे नहीं खर्च करने हैं, जोड़ के रख। पर स्वीटी कहाँ सुनने वाली थी। उसके गांव से सबसे नजदीक का शहर लखनऊ था। उसने पूछ जाँच कर लखनऊ से मुंबई का, जाने का टिकट तो हवाई जहाज से करा दिया और आने का ट्रैन से। खर्च भी तो देखना था।
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आज सन्नो बड़ी खुश है। घूम घूम कर गांव में सबको बता रही है और मिठाई बाँट रही है।
'अरे चाची! गोलू भाभी! दीदी जी! सुन रही हो, डिंपल के बच्चा हुआ है। '
'बहुत बधाई' जो भी सुनता, बोल देता और सन्नो का चहकना देखता ही रह जाता। गांव की सभी औरतें सन्नो के इस ख़ुशी पर आश्चर्य कर रही थीं । अभी तक तो वह मुंह लटकाये रहती थी, घर में जब देखो कलह; आज वह अपनी सौत के बच्चा होने पर इतना खुश ! यह बात सबके ही समझ से परे थी।
दरअसल, सन्नो के तीन लड़कियां ही थीं, अल्ला ने कोई लड़का नहीं बख्शा। मन्ना, माँ बाप का एकलौता बेटा था । सन्नो की सास हमेशा कोसती कि अगर बेटा नहीं हुआ तो आगे वंश कैसे चलेगा ! बेचारी बनी सन्नो कह देती, क्या करें अम्मा जी कोई बश की बात थोड़े ही है। मगर वह समय समय पर ताने कसने से बाज नहीं आती थी। अब सौत के भी बेटी होगी तो खुश होगी ही।
मन्ना की माँ ने उसके दिमाग में भी यह कूट कूट कर भर दिया था कि बेटा नहीं होगा तो वंश कैसे चलेगा, मन्ना को समझाती कि वह एक और शादी कर ले। मन्ना कहता 'क्या गारंटी है कि दूसरी से बेटा ही होगा।' पर नई दुल्हन किसे नहीं भाती। मां के बार बार कहने से उसकी मति फिर ही गयी। उसे भी लगने लगा था कि बेटा नहीं हुआ तो उसका वंश यहीं ख़त्म हो जायेगा। एक बार मन्ना ससुराल गया। जब वह घर लौटा तो उसके साथ एक युवती। सभी देखकर अचंभित। 'यह कौन?' सन्नो ने पूछा।
'तुम्हारे लिए आया लाया हूँ, ये डिंपल है, तुम्हारी सेवा करेगी,' मन्ना बोला।
सन्नो के तो पांव के तले से जमीन ही खिसक गयी। उसको सब समझने में देर नहीं लगी, जोर से चिंघाड़े मारने लगी। 'हाय मेरी सौत! हाय मेरी सौत!'
सन्नो की तो दुनिया ही बदल गयी, कभी सोचा भी नहीं था उसकी जिंदगी में कोई सौत भी आएगी।
मन्ना की माँ भी हतप्रभ थी, वह पूछ बैठी, 'भगा कर लाया है ?'
'नहीं माँ, गरीब घर की है, इसके माँ बाप की रजामंदी से लाया हूँ। सन्नो के मायके के पास ही एक गांव है वहीँ की है। तू वंश चलाने को कहती थी न, इसीलिये। चलकर किसी पूजास्थल पर विवाह कर लेंगे। इसके माँ बाप भी वहीँ आ जायेंगे । '
मन्ना जब ससुराल जाता था तो पास के उस गांव में भी टहलते चला जाता। डिंपल के परिवार से जान पहचान हो गयी। प्यार तो नहीं पर मन्ना के व्यक्तित्व पर वह आकर्षित हो गयी थी। बस उसके कहने भर की देर थी उसके साथ चल दी।
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मन्ना जब ससुराल जाता था तो पास के उस गांव में भी टहलते चला जाता। डिंपल के परिवार से जान पहचान हो गयी। प्यार तो नहीं पर मन्ना के व्यक्तित्व पर वह आकर्षित हो गयी थी। बस उसके कहने भर की देर थी उसके साथ चल दी।
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सन्नो के तो रो कर पागल सी हुई जा रही थी। यह सब क्या हो गया, अल्ला ! कैसा दिन दिखा दिया। वह सुबह उठते ही अपना सामान बांधी और मायके चल दी। इधर गांव में मन्ना की थू थू होने लगी। दो चार दिन हुए, पास पड़ोस ने मन्ना को समझाया, जो किया, सो किया अब जाकर अपनी बीबी को मनाकर ले आ। सन्नो के मायके वाले गुस्से में मन्ना के यहाँ आये। उसे ऐसा न करने के लिए कहा। पर मन्ना शांति भाव से उन्हें समझ लिया कि उसे कोई परेशानी नहीं होने वाली है। बेटियां तो ससुराल चली गयीं, अगर बेटा होगा तो उसकी भी तो देख भाल करेगा। फिर मान मनव्वल हुआ, सबने सन्नो को समझाया बुझाया और मना फुसला कर मन्ना उसे वापस ले आया।
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खैर, समय के साथ कुछ तो घाव भरा पर सौत तो सौत। वह गर्भवती हुई तो घर में उसकी मान मर्यादा का बढ़ना स्वभाविक था और साथ ही सन्नो की डाह। अब डिंपल के आराम वगैरह का पूरा ख्याल रखा जाने लगा। मन्ना, जहाँ पहले कहता कि डिंपल सन्नो की सेवा करेगी अब उलटा सन्नो को ही उसकी देख भाल करने को कहता रहता। सन्नो अब पहले से और अधिक दुखी रहने लगी। घर में अब नैंसी के अलावा, उसका साथ कोई नहीं देता। जैसे जैसे डिंपल का समय समीप आता, बाकी तो सब खुश होते पर सन्नो की बेचैनी बढ़ती जाती। सोचती, अभी यह हाल है कल को इसका बेटा हो जायेगा तो ये लोग क्या हाल करेंगे। कभी सोच कर बहुत दुखी हो जाती तो कभी किस्मत को कोसती। यही किस्मत में लिखा है तो कोई क्या कर लेगा।
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खैर, समय के साथ कुछ तो घाव भरा पर सौत तो सौत। वह गर्भवती हुई तो घर में उसकी मान मर्यादा का बढ़ना स्वभाविक था और साथ ही सन्नो की डाह। अब डिंपल के आराम वगैरह का पूरा ख्याल रखा जाने लगा। मन्ना, जहाँ पहले कहता कि डिंपल सन्नो की सेवा करेगी अब उलटा सन्नो को ही उसकी देख भाल करने को कहता रहता। सन्नो अब पहले से और अधिक दुखी रहने लगी। घर में अब नैंसी के अलावा, उसका साथ कोई नहीं देता। जैसे जैसे डिंपल का समय समीप आता, बाकी तो सब खुश होते पर सन्नो की बेचैनी बढ़ती जाती। सोचती, अभी यह हाल है कल को इसका बेटा हो जायेगा तो ये लोग क्या हाल करेंगे। कभी सोच कर बहुत दुखी हो जाती तो कभी किस्मत को कोसती। यही किस्मत में लिखा है तो कोई क्या कर लेगा।
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नौ महीने पूरे हुये, डिंपल अस्पताल गयी। कुछ ही समय बीता, अस्प्ताल से समाचार मिला। सन्नो को यह सुन कर, मानो कितनी ख़ुशी मिल गयी कि डिम्पल के लड़की हुई है फिर तो सब काम छोड़ कर गांव में सबको बताने निकल पड़ी। और वक्त गुजरा, और खुदा ने उसे एक और लड़की नवाजा। अब सन्नो और डिंपल का दर्जा लगभग बराबर हो चुका था। हाँ, नयी और पुरानी का अंतर तो रहेगा ही। सन्नो की तीनों बेटियों की शादी हो चुकी थी। सन्नो हालात से समझौता कर चुकी थी। वह समझदार थी, उसने सोचा कि झंझट करने से नुकसान ही है। डिंपल की बेटियों को प्यार करेगी तो उसे बेटियों के आलावा डिंपल और मन्ना का भी सम्मान मिलेगा।वह सौतिया डाह छोड़कर, डिंपल की बेटियों से प्यार करने लगी। उनकी देख भाल और उनकी पढ़ाई पर जोर देने लगी। स्वीटी और मीठी दोनों स्कूल जाती थीं और घर आते ही बड़ी मम्मी से लिपट जातीं।
मन्ना उन्हें आगे नहीं पढ़ाना चाहता था जब कि पढ़ने में वे दोनों ही तेज थीं। मन्ना अपने थोड़े से खेत से परिवार के पेट भरने भर पैदा कर लेता था । मन्ना सोचता कि बेटियों को दूसरे के घर जाना है अतः उनकी पढ़ाई पर खर्च करना बेकार होगा । पढ़ाने में जो खर्च करेगा वह पैसा शादी के खर्च के लिए काम आएगा। सन्नो उन दोनों की पढ़ाई की अकेले ही समर्थक थी। वह पढ़ाई का महत्व जानती थी। उसका मानना था कि अपनी बेटियों को तो पढ़ा नहीं पायी, कम से कम ये ही पढ़ लें। पिछले जन्म में कौन सा पाप किया कि सौत का मुंह देखना पड़ा। ये पढ़ लिख लेंगी तो अपने पैरों पर खड़ी हो जाएँगी, पुण्य भी हो जायेगा । बिजेंदर मास्टर भी कभी मिलते तो उनकी पढ़ाई की प्रशंशा करते और आगे पढ़ने के लिए प्रेरित करते। सन्नो तो उन्हें पढ़ाने लिखाने पर अधिक जोर देती पर मन्ना और डिंपल उनका जल्दी से शादी व्याह करके छुटकारा पाना चाहते थे। सन्नो की बेटियां भी जब आतीं तो पढ़ाई की ही सलाह देतीं। बहनों सौतेला व्यौहार बिलकुल भी नहीं था। सन्नो ने स्वीटी और मीठी का हौसला बढ़ाये रखा और उसके जिद्द के कारण उनकी पढ़ाई चलती रही।
मन्ना उन्हें आगे नहीं पढ़ाना चाहता था जब कि पढ़ने में वे दोनों ही तेज थीं। मन्ना अपने थोड़े से खेत से परिवार के पेट भरने भर पैदा कर लेता था । मन्ना सोचता कि बेटियों को दूसरे के घर जाना है अतः उनकी पढ़ाई पर खर्च करना बेकार होगा । पढ़ाने में जो खर्च करेगा वह पैसा शादी के खर्च के लिए काम आएगा। सन्नो उन दोनों की पढ़ाई की अकेले ही समर्थक थी। वह पढ़ाई का महत्व जानती थी। उसका मानना था कि अपनी बेटियों को तो पढ़ा नहीं पायी, कम से कम ये ही पढ़ लें। पिछले जन्म में कौन सा पाप किया कि सौत का मुंह देखना पड़ा। ये पढ़ लिख लेंगी तो अपने पैरों पर खड़ी हो जाएँगी, पुण्य भी हो जायेगा । बिजेंदर मास्टर भी कभी मिलते तो उनकी पढ़ाई की प्रशंशा करते और आगे पढ़ने के लिए प्रेरित करते। सन्नो तो उन्हें पढ़ाने लिखाने पर अधिक जोर देती पर मन्ना और डिंपल उनका जल्दी से शादी व्याह करके छुटकारा पाना चाहते थे। सन्नो की बेटियां भी जब आतीं तो पढ़ाई की ही सलाह देतीं। बहनों सौतेला व्यौहार बिलकुल भी नहीं था। सन्नो ने स्वीटी और मीठी का हौसला बढ़ाये रखा और उसके जिद्द के कारण उनकी पढ़ाई चलती रही।
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अब वे दोनों बड़ी हो गयी हैं। पढ़ लिख कर दोनों अच्छी नौकरी कर रही हैं। हर महीने तनख्वाह पाकर घर लाना उनके लिए बड़े फक्र की बात है। उन्हें इस बात का एहसास है कि बेटियों को जन्म देने के कारण बड़ी माँ ने कितना दुःख सहा, ताने सहे, जब कि इसमें उनका कोई अपराध नहीं था। उन्हें इस बात का भी ज्ञान हो चुका है कि औरत की दुश्मन औरत भी होती है। उनकी तकलीफ में खाली मर्दों का हाथ नहीं होता। हम लड़कियां अगर एक औरत का दर्द नहीं समझेंगी तो कौन समझेगा? दोनों के मन में यह संकल्प उपज जाता है कि उन्हें उनकी खोई खुशियां लौटाने के लिए सब कुछ करेंगी। दोनों ही अपनी बड़ी मम्मी को अपनी माँ से भी ज्यादा सम्मान देती हैं और प्यार करतीं हैं। उन दोनों के आगे बढ़ने में सन्नो की बड़ी भूमिका है, इस बात को वे नहीं भूलतीं। हमारे लिए अल्ला ने उन्हें कितनी तकलीफ दिया है । हम भी उन्हें जीते जी कोई तकलीफ नहीं होने देंगी।
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सन्नो उनके प्यार और मान सम्मान से पूरी तरह ओत प्रोत थी। अपनी सगी बेटियां तो ससुराल की होकर रह गयीं और हों भी क्यों नहीं उनके कन्धों पर जिम्मेदारी जो डाल दी। मगर स्वीटी, मीठी ने तो सन्नो को आसमान में उड़ा दिया। जिस तरह से उसकी जिंदगी उड़ने लग पड़ी उसे लगता कि दो पाखें मिल गयी हों। गांव या रिश्तेदारी का जो भी मिलता स्वीटी, मीठी की तारीफ के पुल बाँध देती। उसकी समझदारी, धैर्य और प्यार ने जिंदगी में नया रंग भर दिया था। जहाँ वे लोग लड़कियां होने से खिन्न थे, अब पूरा परिवार कहता है लड़का लड़की में क्या फर्क है ! बस लायक होना चाहिए।
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सन्नो उनके प्यार और मान सम्मान से पूरी तरह ओत प्रोत थी। अपनी सगी बेटियां तो ससुराल की होकर रह गयीं और हों भी क्यों नहीं उनके कन्धों पर जिम्मेदारी जो डाल दी। मगर स्वीटी, मीठी ने तो सन्नो को आसमान में उड़ा दिया। जिस तरह से उसकी जिंदगी उड़ने लग पड़ी उसे लगता कि दो पाखें मिल गयी हों। गांव या रिश्तेदारी का जो भी मिलता स्वीटी, मीठी की तारीफ के पुल बाँध देती। उसकी समझदारी, धैर्य और प्यार ने जिंदगी में नया रंग भर दिया था। जहाँ वे लोग लड़कियां होने से खिन्न थे, अब पूरा परिवार कहता है लड़का लड़की में क्या फर्क है ! बस लायक होना चाहिए।
एस० डी० तिवारी
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