गंगा तलाव
'साहब पहली बार मौरिसस आया है ?' टैक्सी ड्राइवर ने पूछा।
'हाँ, और समझो की आखिरी बार भी।'
'क्यों साहब ? हमसे नाराज हो गया क्या ?'
'नहीं भाई। तुम्हे पता है न इंडिया कितनी दूर है ! इतनी दूर से बार बार आना कहाँ संभव है।'
'हाँ, सो तो है।' ड्राइवर बोला।
'तुम्हारा नाम क्या है?'
'सुदामा'
' वाह! बिलकुल इंडियन नाम है।' आहूजा जी बोले।
'हाँ साहब। हमारे पूर्वज कभी इंडिया से ही आये थे। गंगा तलाव बहुत सुन्दर जगह है, साहब। शिव जी की बहुत बड़ी मूर्ति है। हिन्दू देवी देवताओं के और भी मंदिर हैं। वहां से जाने का आपका दिल नहीं करेगा। हमारे पूर्वजों को यहां सैकड़ों साल पहले आये थे, साब! अब तो हमको कई पुश्त हो गया।'
'इंडिया में कहाँ से आये हो तुम लोग? ' आहूजा जी ने पूछा।
'तुम इंडिया गए हो?'
'अभी नहीं, पर जाने का बहुत मन करता है। असली गंगा के दर्शन करने को जी करता है। गंगा जल लाकर गंगा तलाव में डालने से बहुत पुण्य मिलता है, साहब ! वहां जायेगा तो पूर्वजों की जन्म भूमि के भी दर्शन करेगा।'
'अरे मुझे तो पता नहीं था, वरना मैं भी गंगा जल ले आता।'
बातें करते गंगा तलाव पहुँच गए सुन्दर, हरा भरा, मनमोहक रास्ता। पहुँच कर १०८ फीट ऊँची शिव जी की मूर्ति देख आहूजा जी दंग रह गए। कई छोटे बड़े देवी देवताओं के मंदिर, अनवरत गूंजता 'ओम नमः शिवाय' का मंत्र। ऐसा लग रहा था मानो किसी दिव्या दुनिया में आ गए हों। यह स्थान भी एक ज्योतिर्लिंग है, जब आहूजा साहब को पता लगा तो उनका आश्चर्य और बढ़ गया। उन्हें अभी तक भारत के १२ ज्योतिर्लिंगों के बारे में ही पता था। सुदामा ने फिर बताया, तलाव में स्नान और यहाँ की आरती दिव्य अनुभूति कराती है। आहूजा जी शिव जी का दर्शन कर और गंगा तलाव का अवलोकन कर गदगद थे।
'सुदामा तुमने मेरा मन प्रसन्न कर दिया। इस समय तो मेरे पास कुछ नहीं है जो तुम्हें भेंट करूँ, मगर अपना पता दे दो मैं भारत जाकर तुम्हारे लिए कोई सौगात भेजूंगा।'
'ठीक है साहब, ये लीजिये। फोन नंबर तो मैंने दे ही दिया है।'
लगभग एक महीने बाद, इंडिया से भेजा हुआ, सुदामा को एक कूरियर आया। उसे समझते देर नहीं लगी, यह आहूजा साहब ने ही भेजा होगा। उसने तुरंत ही पैकेट खोला। उसमे एक छोटी बोतल मिली जिस पर लिखा था 'गंगा जल'।
'साहब पहली बार मौरिसस आया है ?' टैक्सी ड्राइवर ने पूछा।
'हाँ, और समझो की आखिरी बार भी।'
'क्यों साहब ? हमसे नाराज हो गया क्या ?'
'नहीं भाई। तुम्हे पता है न इंडिया कितनी दूर है ! इतनी दूर से बार बार आना कहाँ संभव है।'
'हाँ, सो तो है।' ड्राइवर बोला।
'तुम्हारा नाम क्या है?'
'सुदामा'
' वाह! बिलकुल इंडियन नाम है।' आहूजा जी बोले।
'हाँ साहब। हमारे पूर्वज कभी इंडिया से ही आये थे। गंगा तलाव बहुत सुन्दर जगह है, साहब। शिव जी की बहुत बड़ी मूर्ति है। हिन्दू देवी देवताओं के और भी मंदिर हैं। वहां से जाने का आपका दिल नहीं करेगा। हमारे पूर्वजों को यहां सैकड़ों साल पहले आये थे, साब! अब तो हमको कई पुश्त हो गया।'
'इंडिया में कहाँ से आये हो तुम लोग? ' आहूजा जी ने पूछा।
'बाबा कहते हैं, हम लोग बिहार से आया है। हमारे पूर्वज काम की तलाश में यहाँ आये। कलकत्ता से जहाज पकड़ा और यहाँ आ गए। अब तो कई पुश्तों से हम लोग यहाँ हैं। बाबा कहते हैं जब उनके दादा आये थे तो यहाँ रेगिस्तान जैसा था लेकिन उन लोगो ने मेहनत करके इस जगह को इतना सुन्दर बना दिया है। पहले कोई यहाँ आना भी नहीं चाहता था, अब देखिये लाखों लोग यह स्थान देखने आता है। सौ साल से भी ऊपर हो गया उन्हें आये । हम लोग तो अपने को इंडियन ही समझते हैं। यूँ समझिये की इंडिया का एक टुकड़ा काटकर समुद्र के बीच यहाँ रख दिया है।'
'लेकिन वे इण्डिया छोड़ इतनी दूर क्यों आ गए होंगे?' आहूजा साहब ने फिर सवाल किया।
'बाबा कहते हैं कि उस समय यहाँ काम मिलना आसान था। बाबा के बाबा कलकत्ता में कपड़े के कारखाने में काम करते थे। वे बहुत अच्छे कारीगर थे। पर वहां तनखाह बहुत कम मिलती थी। उन्हें इंडिया से बहुत ज्यादा वेतन का लालच मिला और वे यहाँ आ गए। रहते रहते बूढ़े हो गए और बच्चों को यहीं रोजगार मिल गया तो यहीं के होकर रह गए। उस समय तो लोग लालच में या मजबूरी में ही यहाँ आते थे और आज देखिये कि कोई आना भी चाहे तो सरकार अनुमति नहीं देगी।'
'हाँ, सही कह रहे हो। यह जगह है बहुत सुन्दर।'
'हाँ साहब यहाँ कुछ समय रहें तो पूरा मौरिसश को ठीक से देख, समझ पाएंगे। यहाँ को लोग इंडिया को बहुत पसंद करते हैं। इंडिया से कोई बड़ा आदमी आता है तो लोग बहुत खुश होते हैं। लोग हिंदी फिल्मे और हिंदी गाने बहुत पसंद करते हैं। हिन्दुओं के अनेकों मंदिर हैं।''तुम इंडिया गए हो?'
'अभी नहीं, पर जाने का बहुत मन करता है। असली गंगा के दर्शन करने को जी करता है। गंगा जल लाकर गंगा तलाव में डालने से बहुत पुण्य मिलता है, साहब ! वहां जायेगा तो पूर्वजों की जन्म भूमि के भी दर्शन करेगा।'
'अरे मुझे तो पता नहीं था, वरना मैं भी गंगा जल ले आता।'
बातें करते गंगा तलाव पहुँच गए सुन्दर, हरा भरा, मनमोहक रास्ता। पहुँच कर १०८ फीट ऊँची शिव जी की मूर्ति देख आहूजा जी दंग रह गए। कई छोटे बड़े देवी देवताओं के मंदिर, अनवरत गूंजता 'ओम नमः शिवाय' का मंत्र। ऐसा लग रहा था मानो किसी दिव्या दुनिया में आ गए हों। यह स्थान भी एक ज्योतिर्लिंग है, जब आहूजा साहब को पता लगा तो उनका आश्चर्य और बढ़ गया। उन्हें अभी तक भारत के १२ ज्योतिर्लिंगों के बारे में ही पता था। सुदामा ने फिर बताया, तलाव में स्नान और यहाँ की आरती दिव्य अनुभूति कराती है। आहूजा जी शिव जी का दर्शन कर और गंगा तलाव का अवलोकन कर गदगद थे।
'सुदामा तुमने मेरा मन प्रसन्न कर दिया। इस समय तो मेरे पास कुछ नहीं है जो तुम्हें भेंट करूँ, मगर अपना पता दे दो मैं भारत जाकर तुम्हारे लिए कोई सौगात भेजूंगा।'
'ठीक है साहब, ये लीजिये। फोन नंबर तो मैंने दे ही दिया है।'
लगभग एक महीने बाद, इंडिया से भेजा हुआ, सुदामा को एक कूरियर आया। उसे समझते देर नहीं लगी, यह आहूजा साहब ने ही भेजा होगा। उसने तुरंत ही पैकेट खोला। उसमे एक छोटी बोतल मिली जिस पर लिखा था 'गंगा जल'।
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