प्रिंसिपल का कमरा किधर है ब्रेन ने एक बच्चे से पूछा
बस सीधे जा के उधर घूम जाना। आप नए टीचर हैं सर?
नहीं, मुझे इस बच्चे जन्मेजय को दाखिला दिलाना है।
बच्चा जोर का ठहाका लगाता है। हा, हा, ये तो अंकल हैं। दाखिला का नाम सुनकर और सभी बच्चे जोर से हंसने लग पड़ते हैं। हा हा हा, इतना बड़ा बच्चा प्राथमिक कक्षा में! बड़ी अजीब बात। देखने में तो चालीस के ऊपर का लगता है और दाखिला लेने आया है प्राथमिक पाठशाला में । एक बच्चा बोला।
दूसरा बच्चा, 'अरे यह तो अंग्रेज का बच्चा लग रहा है।
ब्रेन उनका ध्यान न देते हुए प्रिंसिपल के कमरे की ओर बढ़ चला।
'मे आई कम इन सर?'
'एस, कम इन ' ।
सर, इसका आपके स्कूल में दाखिला कराना है।
'यह कोई यूनिवर्सिटी थोड़े ही है कि रिसर्च करेगा, यह तो प्राथमिक पाठशाला है। यहाँ बस आठवीं तक ही पढाई होती है।'
'नहीं प्रिंसिपल साहब, अभी तक यह किसी पाठशाला नहीं गया। पहली या दूसरी में दाखिल करना है। '
'यह कैसे हो सकता है, यहाँ आठ दस साल के बच्चे पढ़ते हैं, ये महाशय तो चालीस से भी ऊपर के लगते हैं और पहली कक्षा मे.…'
'नहीं सर, अभी तीन महीने का ही है।'
प्रिंसिपल ने व्यंग में, 'तीन महीने का ? किस माँ ने इतने बड़े बच्चे को जना।'
'दरअसल वो मैं हूँ। बस, आप इसका नाम लिख ले।'
आप इसके कौन हैं ?
'पिता।'
"पिता !, बेटे से भी छोटा बाप ! मेरी तो समझ में नहीं आ रहा कि यह बाप साथ आया है या बेटे के! जो दाखिला दिलाने आया है वह इसके बेटे की उम्र का है।"
प्रिंसिपल हैरत में है, ब्रेन की सभी बातें उटपटांग लग रही थीं। इतना अजीबोगरीब क्षण तो इससे पहले जिंदगी में कभी नहीं आया। उसे ब्रेन की बातों पर क्रोध भी आ रहा था और बात करने की उत्सुकता भी बढ़ रही थी।
'किन्तु आप तो इसे तीन महीने का बता रहे हैं। दाखिले के लिए कम से कम पांच वर्ष होना चाहिए। जाईये पांच वर्ष पश्चात ले आईये।'
ब्रेन ने काफी समझाया, 'इसका विकसित मष्तिष्क है, प्राथमिक पाठशाला की पढ़ाई पूरा करने में अधिक समय नहीं लगेगा। हो सकता है, एक सप्ताह में ही सारा कुछ सीख ले। '
'कुछ विचार कर प्रिंसिपल बोला अच्छा जन्म प्रमाणपत्र दिखाईये।'
सर्टिफिकेट देख कर प्रिंसिपल बोला, 'यह तो किसी अस्पताल का नहीं है ... '
'हाँ , इसका जन्म विदेश में एक ..... में हुआ है।'
बड़े अनुनय विनय के बाद, किसी तरह दाखिला हुआ।
अब स्कूल का बेंच जनमेजय को बैठने के लिए बहुत छोटा था, उसे जमीन पर बैठने के लिए कहा गया।
मध्यहार में कई बच्चों का भोजन वह अकेले खा जाता। कैंटीन वाला ने उसके खाने के लिए अधिक पैसे की मांग की। प्रिंसिपल ने ऊपर से अप्रोवल की बात कह कर टाल दिया।
जनमेजय की सीखने की बड़ी उतसुकता थी। दो तीन दिन में ही पूछ पूछ कर पूरी पुस्तक याद कर लिया।
स्कूल प्रशासन के समक्ष समस्या थी कि उक्त कक्षा में उसे और अधिक पढने की आवश्यकता नहीं तो अनायास ही क्यों समय व्यर्थ किया जाय। उसे अगली कक्षा में बिठा दिया वहां भी एक सप्ताह में सब सिख लिया। यहाँ तक कि दो माह में ही पांचवीं में पहुंच गया।
स्कूल को अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ा। वह छोटे बच्चों के साथ खेल नहीं सकता था। फुटबाल खेलता तो उसके पास से गेंद किसी और के पास जा ही नहीं पति और एक ही किक में गेंद मैदान से भी बाहर। वैसे ही क्रिकेट का खेल। उसके खेलने पर बच्चे आपत्ति करते। मगर जब खेल से बाहर रखा जाता वह ताकता बोर होता। बच्चों ने उसका नाम सुपरमैन रख दिया।
साल से पहले ही आठंवीं तक का कोर्स पूरा कर लिया। अब यह निर्णय लिया गया कि ओपन स्कूल से मेट्रिक की परीक्षा में बिठाया जाय। हाई स्कूल भी डिस्टिंक्शन के साथ पास हो गया।
वैज्ञानिकों की टीम कार्य पर लग गयी है। लैब में हलचल है। धीरे धीरे सामान्य तापमान पर लाया जाता है। वैज्ञानिक जी जान से जुटे हुए हैं। खून द्रवित करने के रसायन काम करना प्रारम्भ कर चुका है। ४८ घंटे में खून नाडियों में प्रवाहित होने लगेगा। तब तक सघन निरिक्षण में रखना होगा। लाइफ सपोर्ट संयंत्र लगा दिया गया है। कृत्रिम सांस देने की व्यवस्था हो चुकी है। अतिरिक्त खून चढ़ाने के लिए ताजा खून भी रख लिया गया है। हाथ पैर हिलने डुलने लगे। अभी दिल नहीं धड़क रहा है। ह्रदय विशेषज्ञ को बुलाओ। पेस मेकर लगा दिया जाता है। सुखद आश्चर्य से वैज्ञानिक प्रसन्न दिल धड़क उठता है। अब तो बस ऑंखें खुलना शेष है।
जाँच में पता चला आंख की एक नस में रक्त प्रवाहित नहीं हो पा रहा है। ठण्ड से नस सिकुड़ गयी है। दबाव देकर वहां तक खून पहुँचाया जा सकता है। हां यह भी काम पूरा हुआ। पलक हिली और आंख भी खुल गयी।
हाथ में बैंड बंधा हुआ है
दृश्य
उसे लग रहा था अभी वह गहरी निद्रा से उठा है। एक सप्ताह में स्वस्थ होने के बाद जब वह बाहर निकल तो सब कुछ बदला बदला। यह तो एकदम अलग स्थान था। यहाँ का वातावरण, मौसम आदि सब अलग।
उसने पूछा मैं कहाँ हूँ ?
वाशिंगटन में
जन्मेजय को अंग्रेजी नहीं आती और वैज्ञानिकों को हिंदी। अब तो बड़ी समस्या हो गयी उससे कैसे पूछ ताछ करे। एक वैज्ञानिक जो भारतीय मूल का था, हिंदी आती थी।
ये क्या है मोटर साइकिल
हवाई जहाज को देखकर, देखो कितनी बड़ी चिड़िया उड़ रही है
नहीं यह हवाई जहाज है। उसमे आदमी बैठे हैं।
टेलीविज़न, पक्की सड़क, ऊँचे भवन इतने आदमी। इतने कम समय में सब कैसे
जब सोया था तो कुछ नहीं था। ये पहाड़ ये मौसम सब कहाँ से आ गए।
यह अमेरिक हैं इंडिया नहीं।
मेट्रो ट्रैन ऐसी बस यह सब तो इंडिया में नहीं है
जब वहां जायेगा तब न पता चलेगा। अब इंडिया वो इंडिया नहीं है
तुम्हें पता है तुम्हारा घर कहाँ है। हाँ दिल्ली
नहीं, मुझे तो भारत जाना है लेकिन वहां मेरा कोई होगा कि नहीं
पुराणी कहानी ---
इतिहास
रिश्ते / सम्बन्ध
मेरे पिता कौन हैं
तू तो सबका बाप है। जाने कितनी पीढियां बीत चुकी होंगी।
हाँ मेरे एक बेटा था उसकी शादी कर दी थी
तू तो मुझे विरासत में मिला है पता नहीं कितने लोग तेरे बाद होंगे
नगर के आधे लोग तो तेरे ही वंशज होंगे
विद्यालय
मित्र युवा वर्ग का कोई मित्र ही नहीं बनता। जिससे विवाह, हुआ पता चला उसका डी एन ए वही है। यह तो सैग गड़बड़ है
विदेश से देश
प्रयोगशाला
दम घुटने से मौत
लाशों में रसायन लेप
तापमान
१० लाशें राखी गयीं
उसकी देख भल के लिए वैज्ञानिकों की टीम
कई शरीरी पर काम किया जा रहा था। पर सफलता नहीं मिल पा रही थी
बीच का समय/ विकास
ज्ञान
समाज
परिवेश - भीड़
संचार यातायात
तानसेन
इच्छा जताई थी
मीडिया से बचाना है
डूबा तारा फिर उग आया
दुनिया चलती रही
सत्रहवीं शताब्दी की बात है, भारत से सामान भरकर जहाज लन्दन जा रहा था। ब्रेन की नियुक्ति उसी जहाज में थी। जहाज लन्दन पहुंचने ही वाला था की किसी रासायनिक गैस का रिसाव हुआ और ब्रेन बेहोश हो गया लन्दन पहुंच कर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया पर बचाया नहीं जा सका । जर्मन की एक टीम जिंदगीअन्वेषण कर रही थी। उसी टीम के एक डॉक्टर इब्राहिम ने उसे पुनर्जीवित करने के लिए प्रयोग करने की सोची और पुनर्जन्म के बारे में उसकी लाश लेने वाला कोई नहीं था।
लाल किला, इतनी ऊँची इमारतें, सड़कें भीड़ उसके लिए सब कुछ कौतुहल का विषय थीं
क्या प्यारी सी लड़की जा रही है। इतनी सुन्दर लड़की तो अब तक देखा ही नहीं। और पास से देखने की इच्छा जागृत हो उठी
'कहाँ पढ़ती हो ?'
'श्रीकृष्ण पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज'
'मुझे उसी कॉलेज में नौकरी मिली है। क्या सब्जेक्ट लिए हैं
'साईकोलॉजी' से एम् ए कर रही हूँ'
'बहुत अच्छा विषय है
मिलने का सिलसिला चलता रहा '
एक दिन ब्रेन बोला, तुम्हारा नाम क्या है
'कमली'
एक दिन धीरे धीरे प्यार होगया
एक दिन ब्रेन ने कहा तुम्हारा पूरा नाम क्या है
'कमली रघुवंशी
अरे मैं भी तो उसी खानदान का हूँ
फिर मन में सोचने लगा अवश्य ही इसके अंदर मेरा खून दौड़ रहा होगा। डी एन ए जांच हो तो पता चलेगा यह मेरी ही वंशज होगी ।
ब्रेन को बस इतना याद था। उसके एक बेटा था। उसकी पत्नी बड़े घर की थी। वह छोड़ कर चली गयी। उस समय उसका नाम था रेवती रघुवंशी। बेटे का नाम रखा था रमन्ना। पत्नी उग्र दिमाग की थी बात बात पर झगड़ पड़ती। रेवती ने नशे का सहारा लिया। शोभा रमन्ना को लेकर चली गयी। किसी और से प्यार था।
रेवती को अकेले ही जिंदगी कटनी थी। पहले तो दूसरी शादी की सोचा पर एक प्रोजेक्ट पर उसे लंदन जाना था।
पता नहीं वापस लौटे भी या नहीं इसलिए अभी के लिए टाल दिया।
सारी धरती पर खोज लिया कहीं नहीं मिली
लगता है कोई दूसरे गृह पर भगा ले गया
पृथ्वी से एक और लड़की गायब
गायब होने की सिलसिला लगातार चल रहा है
वहां खाने की बहुत दिक्कत गेहूं नहीं नमक नहीं यहाँ से आयात
सूखे अन्न नहीं ठंडा प्रदेश कच्चा ही खाना
लकड़ी नहीं
गैस, पानी से बिजली से पकाना
दूसरे ग्रह से विवाह करने आये हैं
यहां के दुल्हन के परिधान में ले जायेंगे
बस सीधे जा के उधर घूम जाना। आप नए टीचर हैं सर?
नहीं, मुझे इस बच्चे जन्मेजय को दाखिला दिलाना है।
बच्चा जोर का ठहाका लगाता है। हा, हा, ये तो अंकल हैं। दाखिला का नाम सुनकर और सभी बच्चे जोर से हंसने लग पड़ते हैं। हा हा हा, इतना बड़ा बच्चा प्राथमिक कक्षा में! बड़ी अजीब बात। देखने में तो चालीस के ऊपर का लगता है और दाखिला लेने आया है प्राथमिक पाठशाला में । एक बच्चा बोला।
दूसरा बच्चा, 'अरे यह तो अंग्रेज का बच्चा लग रहा है।
ब्रेन उनका ध्यान न देते हुए प्रिंसिपल के कमरे की ओर बढ़ चला।
'मे आई कम इन सर?'
'एस, कम इन ' ।
सर, इसका आपके स्कूल में दाखिला कराना है।
'यह कोई यूनिवर्सिटी थोड़े ही है कि रिसर्च करेगा, यह तो प्राथमिक पाठशाला है। यहाँ बस आठवीं तक ही पढाई होती है।'
'नहीं प्रिंसिपल साहब, अभी तक यह किसी पाठशाला नहीं गया। पहली या दूसरी में दाखिल करना है। '
'यह कैसे हो सकता है, यहाँ आठ दस साल के बच्चे पढ़ते हैं, ये महाशय तो चालीस से भी ऊपर के लगते हैं और पहली कक्षा मे.…'
'नहीं सर, अभी तीन महीने का ही है।'
प्रिंसिपल ने व्यंग में, 'तीन महीने का ? किस माँ ने इतने बड़े बच्चे को जना।'
'दरअसल वो मैं हूँ। बस, आप इसका नाम लिख ले।'
आप इसके कौन हैं ?
'पिता।'
"पिता !, बेटे से भी छोटा बाप ! मेरी तो समझ में नहीं आ रहा कि यह बाप साथ आया है या बेटे के! जो दाखिला दिलाने आया है वह इसके बेटे की उम्र का है।"
प्रिंसिपल हैरत में है, ब्रेन की सभी बातें उटपटांग लग रही थीं। इतना अजीबोगरीब क्षण तो इससे पहले जिंदगी में कभी नहीं आया। उसे ब्रेन की बातों पर क्रोध भी आ रहा था और बात करने की उत्सुकता भी बढ़ रही थी।
'किन्तु आप तो इसे तीन महीने का बता रहे हैं। दाखिले के लिए कम से कम पांच वर्ष होना चाहिए। जाईये पांच वर्ष पश्चात ले आईये।'
ब्रेन ने काफी समझाया, 'इसका विकसित मष्तिष्क है, प्राथमिक पाठशाला की पढ़ाई पूरा करने में अधिक समय नहीं लगेगा। हो सकता है, एक सप्ताह में ही सारा कुछ सीख ले। '
'कुछ विचार कर प्रिंसिपल बोला अच्छा जन्म प्रमाणपत्र दिखाईये।'
सर्टिफिकेट देख कर प्रिंसिपल बोला, 'यह तो किसी अस्पताल का नहीं है ... '
'हाँ , इसका जन्म विदेश में एक ..... में हुआ है।'
बड़े अनुनय विनय के बाद, किसी तरह दाखिला हुआ।
अब स्कूल का बेंच जनमेजय को बैठने के लिए बहुत छोटा था, उसे जमीन पर बैठने के लिए कहा गया।
मध्यहार में कई बच्चों का भोजन वह अकेले खा जाता। कैंटीन वाला ने उसके खाने के लिए अधिक पैसे की मांग की। प्रिंसिपल ने ऊपर से अप्रोवल की बात कह कर टाल दिया।
जनमेजय की सीखने की बड़ी उतसुकता थी। दो तीन दिन में ही पूछ पूछ कर पूरी पुस्तक याद कर लिया।
स्कूल प्रशासन के समक्ष समस्या थी कि उक्त कक्षा में उसे और अधिक पढने की आवश्यकता नहीं तो अनायास ही क्यों समय व्यर्थ किया जाय। उसे अगली कक्षा में बिठा दिया वहां भी एक सप्ताह में सब सिख लिया। यहाँ तक कि दो माह में ही पांचवीं में पहुंच गया।
स्कूल को अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ा। वह छोटे बच्चों के साथ खेल नहीं सकता था। फुटबाल खेलता तो उसके पास से गेंद किसी और के पास जा ही नहीं पति और एक ही किक में गेंद मैदान से भी बाहर। वैसे ही क्रिकेट का खेल। उसके खेलने पर बच्चे आपत्ति करते। मगर जब खेल से बाहर रखा जाता वह ताकता बोर होता। बच्चों ने उसका नाम सुपरमैन रख दिया।
साल से पहले ही आठंवीं तक का कोर्स पूरा कर लिया। अब यह निर्णय लिया गया कि ओपन स्कूल से मेट्रिक की परीक्षा में बिठाया जाय। हाई स्कूल भी डिस्टिंक्शन के साथ पास हो गया।
वैज्ञानिकों की टीम कार्य पर लग गयी है। लैब में हलचल है। धीरे धीरे सामान्य तापमान पर लाया जाता है। वैज्ञानिक जी जान से जुटे हुए हैं। खून द्रवित करने के रसायन काम करना प्रारम्भ कर चुका है। ४८ घंटे में खून नाडियों में प्रवाहित होने लगेगा। तब तक सघन निरिक्षण में रखना होगा। लाइफ सपोर्ट संयंत्र लगा दिया गया है। कृत्रिम सांस देने की व्यवस्था हो चुकी है। अतिरिक्त खून चढ़ाने के लिए ताजा खून भी रख लिया गया है। हाथ पैर हिलने डुलने लगे। अभी दिल नहीं धड़क रहा है। ह्रदय विशेषज्ञ को बुलाओ। पेस मेकर लगा दिया जाता है। सुखद आश्चर्य से वैज्ञानिक प्रसन्न दिल धड़क उठता है। अब तो बस ऑंखें खुलना शेष है।
जाँच में पता चला आंख की एक नस में रक्त प्रवाहित नहीं हो पा रहा है। ठण्ड से नस सिकुड़ गयी है। दबाव देकर वहां तक खून पहुँचाया जा सकता है। हां यह भी काम पूरा हुआ। पलक हिली और आंख भी खुल गयी।
हाथ में बैंड बंधा हुआ है
दृश्य
उसे लग रहा था अभी वह गहरी निद्रा से उठा है। एक सप्ताह में स्वस्थ होने के बाद जब वह बाहर निकल तो सब कुछ बदला बदला। यह तो एकदम अलग स्थान था। यहाँ का वातावरण, मौसम आदि सब अलग।
उसने पूछा मैं कहाँ हूँ ?
वाशिंगटन में
जन्मेजय को अंग्रेजी नहीं आती और वैज्ञानिकों को हिंदी। अब तो बड़ी समस्या हो गयी उससे कैसे पूछ ताछ करे। एक वैज्ञानिक जो भारतीय मूल का था, हिंदी आती थी।
ये क्या है मोटर साइकिल
हवाई जहाज को देखकर, देखो कितनी बड़ी चिड़िया उड़ रही है
नहीं यह हवाई जहाज है। उसमे आदमी बैठे हैं।
टेलीविज़न, पक्की सड़क, ऊँचे भवन इतने आदमी। इतने कम समय में सब कैसे
जब सोया था तो कुछ नहीं था। ये पहाड़ ये मौसम सब कहाँ से आ गए।
यह अमेरिक हैं इंडिया नहीं।
मेट्रो ट्रैन ऐसी बस यह सब तो इंडिया में नहीं है
जब वहां जायेगा तब न पता चलेगा। अब इंडिया वो इंडिया नहीं है
तुम्हें पता है तुम्हारा घर कहाँ है। हाँ दिल्ली
नहीं, मुझे तो भारत जाना है लेकिन वहां मेरा कोई होगा कि नहीं
पुराणी कहानी ---
इतिहास
रिश्ते / सम्बन्ध
मेरे पिता कौन हैं
तू तो सबका बाप है। जाने कितनी पीढियां बीत चुकी होंगी।
हाँ मेरे एक बेटा था उसकी शादी कर दी थी
तू तो मुझे विरासत में मिला है पता नहीं कितने लोग तेरे बाद होंगे
नगर के आधे लोग तो तेरे ही वंशज होंगे
विद्यालय
मित्र युवा वर्ग का कोई मित्र ही नहीं बनता। जिससे विवाह, हुआ पता चला उसका डी एन ए वही है। यह तो सैग गड़बड़ है
विदेश से देश
प्रयोगशाला
दम घुटने से मौत
लाशों में रसायन लेप
तापमान
१० लाशें राखी गयीं
उसकी देख भल के लिए वैज्ञानिकों की टीम
कई शरीरी पर काम किया जा रहा था। पर सफलता नहीं मिल पा रही थी
बीच का समय/ विकास
ज्ञान
समाज
परिवेश - भीड़
संचार यातायात
तानसेन
इच्छा जताई थी
मीडिया से बचाना है
डूबा तारा फिर उग आया
दुनिया चलती रही
सत्रहवीं शताब्दी की बात है, भारत से सामान भरकर जहाज लन्दन जा रहा था। ब्रेन की नियुक्ति उसी जहाज में थी। जहाज लन्दन पहुंचने ही वाला था की किसी रासायनिक गैस का रिसाव हुआ और ब्रेन बेहोश हो गया लन्दन पहुंच कर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया पर बचाया नहीं जा सका । जर्मन की एक टीम जिंदगीअन्वेषण कर रही थी। उसी टीम के एक डॉक्टर इब्राहिम ने उसे पुनर्जीवित करने के लिए प्रयोग करने की सोची और पुनर्जन्म के बारे में उसकी लाश लेने वाला कोई नहीं था।
लाल किला, इतनी ऊँची इमारतें, सड़कें भीड़ उसके लिए सब कुछ कौतुहल का विषय थीं
क्या प्यारी सी लड़की जा रही है। इतनी सुन्दर लड़की तो अब तक देखा ही नहीं। और पास से देखने की इच्छा जागृत हो उठी
'कहाँ पढ़ती हो ?'
'श्रीकृष्ण पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज'
'मुझे उसी कॉलेज में नौकरी मिली है। क्या सब्जेक्ट लिए हैं
'साईकोलॉजी' से एम् ए कर रही हूँ'
'बहुत अच्छा विषय है
मिलने का सिलसिला चलता रहा '
एक दिन ब्रेन बोला, तुम्हारा नाम क्या है
'कमली'
एक दिन धीरे धीरे प्यार होगया
एक दिन ब्रेन ने कहा तुम्हारा पूरा नाम क्या है
'कमली रघुवंशी
अरे मैं भी तो उसी खानदान का हूँ
फिर मन में सोचने लगा अवश्य ही इसके अंदर मेरा खून दौड़ रहा होगा। डी एन ए जांच हो तो पता चलेगा यह मेरी ही वंशज होगी ।
ब्रेन को बस इतना याद था। उसके एक बेटा था। उसकी पत्नी बड़े घर की थी। वह छोड़ कर चली गयी। उस समय उसका नाम था रेवती रघुवंशी। बेटे का नाम रखा था रमन्ना। पत्नी उग्र दिमाग की थी बात बात पर झगड़ पड़ती। रेवती ने नशे का सहारा लिया। शोभा रमन्ना को लेकर चली गयी। किसी और से प्यार था।
रेवती को अकेले ही जिंदगी कटनी थी। पहले तो दूसरी शादी की सोचा पर एक प्रोजेक्ट पर उसे लंदन जाना था।
पता नहीं वापस लौटे भी या नहीं इसलिए अभी के लिए टाल दिया।
सारी धरती पर खोज लिया कहीं नहीं मिली
लगता है कोई दूसरे गृह पर भगा ले गया
पृथ्वी से एक और लड़की गायब
गायब होने की सिलसिला लगातार चल रहा है
वहां खाने की बहुत दिक्कत गेहूं नहीं नमक नहीं यहाँ से आयात
सूखे अन्न नहीं ठंडा प्रदेश कच्चा ही खाना
लकड़ी नहीं
गैस, पानी से बिजली से पकाना
दूसरे ग्रह से विवाह करने आये हैं
यहां के दुल्हन के परिधान में ले जायेंगे
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