Sunday, 15 March 2015

Niwasi


निवासी

गुरमीत के मन में बस यही था का इंगलैंड में बसना है। उसके गांव और आस पास के एकाध लोग लंदन में रहते थे। वहां के बारे में सुनकर उसके मन में इंग्लैंड जाने का सपना घर कर गया था। यह तो उसने पता लगा लिया था अधिकतर लोग उच्च शिक्षा के लिए वहां जाते हैं, और पढ़ लिख कर वहीँ जॉब मिल जाती है। गुरमीत पढ़ा लिखा तो कोई खास था नहीं, किसी तरह माध्यमिक परीक्षा पास कर ली थी। इसलिए पढ़ने के लिए उसका जाना संभव नहीं था।
उसके साथ का पढ़ा एक लड़का दिल्ली रहता था, वह गांव आया था।  गुरमीत ने अपने मन की बात उससे कर ली। उसने उसे सलाह दी कि दिल्ली में वीसा वगैरह दिलाने वाले कई एजेंट हैं उनसे बात कर ले।  वे पैसा लेते हैं और कोई न कोई हल निकाल लेते हैं।  'पर तू तो ज्यादा पढ़ा लिखा है नहीं करेगा क्या ?'
''टैक्सी चलाऊंगा, सुना है टैक्सी में बहुत पैसा है '
गुरमीत दिल्ली एजेंट से मिलने गया और अपनी बात बताया।
एजेंट ने साफ़ बता दिया कि वहां जाने के दो ही विकल्प हैं, या तो आगे की पढ़ाई के लिए जाओ या यहाँ की किसी कंपनी का वहां काम चल रहा हो तो वह भेज सकती है।  टैक्सी चलाने के लिए इंग्लैंड की सरकार थोड़े ही वीसा देती है। गुरमीत थोड़ा निराश तो हुआ पर हिम्मत नहीं हारा। वह एजेंट को पैसे का लालच देने लगा।
'यार सुना है पैसे से सब हो जाता है, तू यह काम करवा मैं पैसे खरचने वास्ते भी तैयार हूँ । क्या है थोड़ी बहुत जमीन भी बेचनी पड़ जाय तो वहां जाकर कमा लूंगा।  थोड़ी ज्यादा मेहनत कर लूंगा। और क्या ?'
पैसे की बात सुनकर एजेंट के कान खड़े हो गए। अच्छा एक  बात बता, 'तू शादी शुदा है ?'
'नहीं, पर क्यों ?'
'बस तो यही करते हैं, वहां की निवासी किसी लड़की से तेरी शादी करवा देते हैं, उसके आधार पर तेरे को वीसा मिल जायेगा। फिर जाकर उससे तलाक ले लेना। '
'वहां की लड़की मुझसे क्यों शादी करेगी ?' गुरमीत ने पूछा।
'अरे वह सब नाटक होगा, वो भी पैसे लेगी।  खाली दिखाने के लिए शादी होगी, सिर्फ कागजों में। वहां जाकर तलाक ले लेना।  वहां तलाक लेने में कोई दिक्कत नहीं होती। '
एजेंट ने जुगाड़ लगाया, एक अंग्रेजन जिसका नाम एन था, से गुरमीत की शादी करवा दिया। गुरमीत इंग्लैंड पहुँच गया और टैक्सी चलाने लगा। वहां की लाइफ से वह बहुत खुश था।

एक दिन वह किसी सवारी को एक होटल में छोड़ने गया वहां एन टैक्सी का इंतजार कर रही थी।  जैसे ही टैक्सी की सवारी उतरी, एन उसमे बैठ गयी। एन समझ नहीं पायी थी जिस टैक्सी में बैठी है, वह गुरमीत ही चला रहा है। गुरमीत ने उसे शीशे में देख लिया और पहचान लिया। गुरमीत ने जैसे ही बोला 'एन ' , वह चौंकी।
'अरे गुरमीत ! प्रजेंटली यू आर माय हसबैंड (अभी तक तुम मेरे पति हो। '
गुरमीत बोला, 'हां, तलाक का काम कब तक होगा?'
'चलो टैक्सी कहीं रोको, साथ काफी पीते हैं। '
गुरमीत एक कैफे में टैक्सी रोकता है, दोनों काफी पीने के लिए बैठ जाते हैं। फिर एन उसे बोलती है 'मैं तुम्हें कैसी लगती हूँ? '
' अच्छी '
'गुरमीत ! तुम भी मुझे बहुत अच्छे लगते हो। मैं तुम्हारे पास आने सोच रही थी, देखो किस्मत कितनी अच्छी है तुम अपने आप ही मिल गये। '
दोनों में बात होती रही।  काफी पीकर बाहर निकले तो एन ने गुरमीत का हाथ पकड़ लिया। 'अगर हम तलाक न लें तो कैसा रहेगा ! तुम आ जाओ मेरे घर मेरे साथ रहो।  मैं अब आगे और नाटक नहीं करना चाहती। '




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