यहाँ भी वहां की
'हम लोग संडे को नीतू के यहाँ गए थे। इंडिया से उसकी माँ आई हैं। बता रही थीं, बंगलोर में उनके तीन पेट्रोल पंप हैं और एक बस चलती है।' वीना ने सुषमा को बताया।
'इससे पहले तो नीतू ने कभी चर्चा नहीं की, कि उसके पेट्रोल पंप हैं और बस चलती है। चल, होगा, हमें क्या ? पर रहन सहन से तो ऐसा कुछ नहीं दिखता। तुझे पता है ? जब ये इंडिया से आये थे तो सोफा पटरी से उठाकर लाये थे। उसकी एक टांग टूटी थी, नीचे ईंट रखकर काम चलाया। बाद में जब पैसा हुआ तो नया खरीदा।' सुषमा बोली।
'तो क्या सोफा इंडिया से लाते ?'
'नहीं, मेरा कहने का मतलब है कि इतने पैसे वाले होते तो पहले ही नया खरीद लेते।'
'हां, सही कह रही है, इतने पैसे होते तो इंडिया छोड़ कर ही क्यों आते !'
'जानती है वीना, नीतू की सैलरी तो तेरे से भी कम है, उसके हस्बैंड का पता नहीं। इतनी कंजूस है कि उसके यहां जाओ तो बिना चाय पानी के ही टरकाने की कोशिश करती है। और पता है, कपडे हमेशा सेल से ही खरीदती है। कभी पार्टी वगैरह करो तो दूर ही रहना चाहती है ताकि अपने हिस्से के पैसे न देने पड़ें। '
'तुझे तो सब खूब मालूम है। '
'मेरा तो पाला पड़ता रहता है न ! भाई खाओ तो खिलाओ भी। ऐसे थोड़े ही चलता है, खाये पिए खिसके। देख हमने उसके बच्चे के जन्मदिन पर इतना महंगा गिफ्ट दिया और उसका देखो, नयन के लिए वही सेल वाली पैंट शर्ट। नयन तो देखते ही नाक मुंह सिकोड़ने लगा। हमने भी पैक कर के रख दिया, आगे बढ़ा देंगे।'
वीना भी सुषमा की बातों में अपनी कुछ जोड़ना चाहती थी, पर उसे इतना सब न तो याद आ रहा था और न ही ज्यादा बात बनानी ही आती थी। फिर भी याद करके बोली -
'एक बात तो मैंने भी नोट किया है, पिकनिक वगैरह पर भी जाओ तो हम लोग इतना कुछ बना कर ले जाते हैं। वो वहां भी चिप्स और सैंडविच से ही काम चला लेती है।'
तभी घंटी बजती है, 'लगता है कुसुम आ गयी। आने को बोली थी।' कहते हुए, वीना दरवाजा खोलती है।
'जब वे पिकनिक पर गए थे तो अंजू ने संध्या को बताया कि दिल्ली में सरला का छोटा सा मकान है। इसके पापा कोई छोटी मोटी नौकरी करते हैं। उनके पास गाड़ी तक नहीं है। ये तो महेश को फंसाकर लव मैरिज करके अमेरिका आ गयी है। यह बात संध्या के पची नहीं और वह सरला से पूछ ली। बस फिर क्या था, अंजू और सरला में फ़ोन पर ही हो गयी। '
'अरे, यह तो बड़ी बुरी खबर लेकर तू आई। कब की बात है ?'
'अभी एक सप्ताह ही हुए हैं, पिछले से पिछले संडे को ही तो पिकनिक पर गए थे। '
'यह तो बड़ी ख़राब बात है, इंडिया का इतिहास लेकर यहां पर टेंशन रखें, बिलकुल भी ठीक नहीं। अंजू को ऐसा नहीं करना चाहिए था। अंजू तो बड़ी खतरनाक लड़की है यार। केयरफुल रहना पड़ेगा। ' सुषमा बड़बड़ाती रही।
वीना उसे चुप कराते हुए, 'चल छोड़, चाय बनाकर पीते हैं। साथ में क्या लेगी ?'
'बस चाय ठीक है। और कामिनी के यहाँ गयी थी कि नहीं। सुना है उसकी भी माँ आई है।'
'नहीं अभी नहीं जा पाए। उन्हें खाने पर बुलाना है। देखते हैं अगले सन्डे को और कोई कार्यक्रम नहीं बना तो बुलाते हैं।' वीना ने कहा।
तभी कुसुम बोल पड़ी, 'कामिनी के पापा यहां आने को तैयार नहीं होते। इसने उनकी मर्जी के खिलाफ शादी की थी, तभी से नाराज हैं। मां का दिल तो नहीं माना, वे चली आईं।'
'ठीक है कभी न कभी वे भी मान जायेंगे। '
वीना अभी चाय छान ही रही होती है कि सोमेश और इला भी आ धमकते हैं। कुसुम, इला को देखते ही चहक उठती है, 'अरे इला हमें तो मिले एक महीने से भी अधिक हो गए। और कैसे है ? तू पिंकी के शादी की वर्षगांठ पर भी नहीं आई थी।'
'हां, हमने वो ग्रुप छोड़ दिया।'
'हं, क्या हो गया।'
'कुछ नहीं, वो अपने को कुछ ज्यादा ही समझते हैं। पिंकी के पापा इंडिया में कस्टम अधिकारी हैं तो बड़ी ताव दिखाती है। सुरभि के पापा किसी प्राइवेट कम्पनी में मैनेजर हैं। एक बार उनकी कंपनी ने कोई सामान इम्पोर्ट किया तो पिंकी के पापा ने उनका माल कम ड्यूटी पर छुड़वा दिया था। पिंकी यह बात सबके सामने गाने लगी। सुरभि को बहुत बुरा लगा। हमसे तो ज्यादा क्लोज सुरभि ही है न। उसे तो हम नहीं छोड़ सकते।'
'अच्छा छोड़, ये चाय ले और सोमेश को दे, तेरे लिए अभी बनती हूँ।' वीना इला की ओर इशारा करते हुए कहा।
'नहीं, मैं चाय नहीं पिऊँगी। कोल्ड में क्या है ?' कहते फ्रिज खोलकर कोक की कैन निकाल ली।
सोमेश कुछ देर तक सब सुनता रहा, फिर अपना मौन तोडा, 'यहाँ हम आये हैं कि सुख शांति की जिंदगी जीने और तुम लोग वही इंडिया का इतिहास यहाँ भी ढो रही हो। वहां की कूटनीति, यहाँ भी ढोते रहे तो जिंदगी नरक हो जाएगी। अरे अपने कमाओ खाओ और मौज मनाओ। लाइफ को एन्जॉय करो। इसने क्या किया, उसने क्या किया, इन सब का टेंशन हम क्यों पालें। उसे जिस तक है, उसी तक छोड़ दो।'
'हम लोग संडे को नीतू के यहाँ गए थे। इंडिया से उसकी माँ आई हैं। बता रही थीं, बंगलोर में उनके तीन पेट्रोल पंप हैं और एक बस चलती है।' वीना ने सुषमा को बताया।
'इससे पहले तो नीतू ने कभी चर्चा नहीं की, कि उसके पेट्रोल पंप हैं और बस चलती है। चल, होगा, हमें क्या ? पर रहन सहन से तो ऐसा कुछ नहीं दिखता। तुझे पता है ? जब ये इंडिया से आये थे तो सोफा पटरी से उठाकर लाये थे। उसकी एक टांग टूटी थी, नीचे ईंट रखकर काम चलाया। बाद में जब पैसा हुआ तो नया खरीदा।' सुषमा बोली।
'तो क्या सोफा इंडिया से लाते ?'
'नहीं, मेरा कहने का मतलब है कि इतने पैसे वाले होते तो पहले ही नया खरीद लेते।'
'हां, सही कह रही है, इतने पैसे होते तो इंडिया छोड़ कर ही क्यों आते !'
'जानती है वीना, नीतू की सैलरी तो तेरे से भी कम है, उसके हस्बैंड का पता नहीं। इतनी कंजूस है कि उसके यहां जाओ तो बिना चाय पानी के ही टरकाने की कोशिश करती है। और पता है, कपडे हमेशा सेल से ही खरीदती है। कभी पार्टी वगैरह करो तो दूर ही रहना चाहती है ताकि अपने हिस्से के पैसे न देने पड़ें। '
'तुझे तो सब खूब मालूम है। '
'मेरा तो पाला पड़ता रहता है न ! भाई खाओ तो खिलाओ भी। ऐसे थोड़े ही चलता है, खाये पिए खिसके। देख हमने उसके बच्चे के जन्मदिन पर इतना महंगा गिफ्ट दिया और उसका देखो, नयन के लिए वही सेल वाली पैंट शर्ट। नयन तो देखते ही नाक मुंह सिकोड़ने लगा। हमने भी पैक कर के रख दिया, आगे बढ़ा देंगे।'
वीना भी सुषमा की बातों में अपनी कुछ जोड़ना चाहती थी, पर उसे इतना सब न तो याद आ रहा था और न ही ज्यादा बात बनानी ही आती थी। फिर भी याद करके बोली -
'एक बात तो मैंने भी नोट किया है, पिकनिक वगैरह पर भी जाओ तो हम लोग इतना कुछ बना कर ले जाते हैं। वो वहां भी चिप्स और सैंडविच से ही काम चला लेती है।'
तभी घंटी बजती है, 'लगता है कुसुम आ गयी। आने को बोली थी।' कहते हुए, वीना दरवाजा खोलती है।
'आ कुसुम! हम इंतजार ही कर रहे थे। सुषमा भी थोड़ी देर पहले ही आई है। '
'और क्या गप्पें हो रही थीं?'
'यही नीतू के पेट्रोल पंप और बस की बात हो रही थी।' वीना ने बताया।
'क्यों क्या हो गया? उनमें तो बड़ी दोस्ती थी।' सुषमा पूछी।'और क्या गप्पें हो रही थीं?'
'यही नीतू के पेट्रोल पंप और बस की बात हो रही थी।' वीना ने बताया।
'छोड़ भी, सभी लोग अपना वतन छोड़ के यहाँ आये हैं, वहां कुछ कमी दिखी होगी तभी तो। 'पता है! आजकल सरला और अंजू में बोल चाल बंद है।' कुसुम ने समाचार दिया।
'जब वे पिकनिक पर गए थे तो अंजू ने संध्या को बताया कि दिल्ली में सरला का छोटा सा मकान है। इसके पापा कोई छोटी मोटी नौकरी करते हैं। उनके पास गाड़ी तक नहीं है। ये तो महेश को फंसाकर लव मैरिज करके अमेरिका आ गयी है। यह बात संध्या के पची नहीं और वह सरला से पूछ ली। बस फिर क्या था, अंजू और सरला में फ़ोन पर ही हो गयी। '
'अरे, यह तो बड़ी बुरी खबर लेकर तू आई। कब की बात है ?'
'अभी एक सप्ताह ही हुए हैं, पिछले से पिछले संडे को ही तो पिकनिक पर गए थे। '
'यह तो बड़ी ख़राब बात है, इंडिया का इतिहास लेकर यहां पर टेंशन रखें, बिलकुल भी ठीक नहीं। अंजू को ऐसा नहीं करना चाहिए था। अंजू तो बड़ी खतरनाक लड़की है यार। केयरफुल रहना पड़ेगा। ' सुषमा बड़बड़ाती रही।
वीना उसे चुप कराते हुए, 'चल छोड़, चाय बनाकर पीते हैं। साथ में क्या लेगी ?'
'बस चाय ठीक है। और कामिनी के यहाँ गयी थी कि नहीं। सुना है उसकी भी माँ आई है।'
'नहीं अभी नहीं जा पाए। उन्हें खाने पर बुलाना है। देखते हैं अगले सन्डे को और कोई कार्यक्रम नहीं बना तो बुलाते हैं।' वीना ने कहा।
तभी कुसुम बोल पड़ी, 'कामिनी के पापा यहां आने को तैयार नहीं होते। इसने उनकी मर्जी के खिलाफ शादी की थी, तभी से नाराज हैं। मां का दिल तो नहीं माना, वे चली आईं।'
'ठीक है कभी न कभी वे भी मान जायेंगे। '
वीना अभी चाय छान ही रही होती है कि सोमेश और इला भी आ धमकते हैं। कुसुम, इला को देखते ही चहक उठती है, 'अरे इला हमें तो मिले एक महीने से भी अधिक हो गए। और कैसे है ? तू पिंकी के शादी की वर्षगांठ पर भी नहीं आई थी।'
'हां, हमने वो ग्रुप छोड़ दिया।'
'हं, क्या हो गया।'
'कुछ नहीं, वो अपने को कुछ ज्यादा ही समझते हैं। पिंकी के पापा इंडिया में कस्टम अधिकारी हैं तो बड़ी ताव दिखाती है। सुरभि के पापा किसी प्राइवेट कम्पनी में मैनेजर हैं। एक बार उनकी कंपनी ने कोई सामान इम्पोर्ट किया तो पिंकी के पापा ने उनका माल कम ड्यूटी पर छुड़वा दिया था। पिंकी यह बात सबके सामने गाने लगी। सुरभि को बहुत बुरा लगा। हमसे तो ज्यादा क्लोज सुरभि ही है न। उसे तो हम नहीं छोड़ सकते।'
'अच्छा छोड़, ये चाय ले और सोमेश को दे, तेरे लिए अभी बनती हूँ।' वीना इला की ओर इशारा करते हुए कहा।
'नहीं, मैं चाय नहीं पिऊँगी। कोल्ड में क्या है ?' कहते फ्रिज खोलकर कोक की कैन निकाल ली।
सोमेश कुछ देर तक सब सुनता रहा, फिर अपना मौन तोडा, 'यहाँ हम आये हैं कि सुख शांति की जिंदगी जीने और तुम लोग वही इंडिया का इतिहास यहाँ भी ढो रही हो। वहां की कूटनीति, यहाँ भी ढोते रहे तो जिंदगी नरक हो जाएगी। अरे अपने कमाओ खाओ और मौज मनाओ। लाइफ को एन्जॉय करो। इसने क्या किया, उसने क्या किया, इन सब का टेंशन हम क्यों पालें। उसे जिस तक है, उसी तक छोड़ दो।'
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