Tuesday, 10 May 2016

Samantvadi loktantra

सामंतवादी लोकतंत्र

एक बार उत्तर प्रदेश के एक सांसद, अपनी कोठी से बाहर निकल रहे थे। उनके सामने से एक ग्रामीण साईकिल सवार उनका ध्यान दिए बिना सामने से निकल गया। सांसद महोदय के सिपहसलार दौड़ कर उसे पकडे और दो तीन रसीद कर दिये।
'देखता नहीं राजा साहब आ रहे हैं! '
ग्रामीण बेचारा मुंह बना कर रह गया। कोई पूछे कि राजा साहब उससे वोट मांगने दुबारा कैसे जायेंगे तो किसी किसी गांव में वोट माँगा नहीं, छीन लिया जाता था। वहां भी वही परंपरा थी।

बिहार के विधान परिषद सदस्य के बेटे ने अपनी कर से आगे निकलने वाले को गोली मारकर 'सामंतवादी लोकतंत्र' की प्रतियोगिता में यूपी को पीछे छोड़ दिया।

एस० डी० तिवारी 

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