तारीख पर नहीं आई
मैसेज का उत्तर आने में देर नहीं लगी - 'मिलना था तो घर आ जाते। कल शाम उसी रेस्तरां में आ जाना, मिल लेते हैं । '
फेस बुक ने एक बार फिर से जोड़ दिया।
एस० डी० तिवारी
पिछली बार कोर्ट आई तो जिस प्रकार देख रही थी, लग रहा था कुछ कहना चाहती है; मगर ख़ामोशी तोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पायी। आखिर अकेले शम्भू की ही गलती तो नहीं थी। फिर कोर्ट में एप्लीकेशन भी खुद ही डाली थी । बात नहीं कंरने का बहुत पछतावा था। घर आकर रोई भी।
शम्भू एक बार गोवा घूमने गया तो वहां की तस्वीर फेस बुक पर डाला। गौरी ने देखते ही समझ लिया की यह उसी होटल का चित्र है, जिसमें वह जब शम्भू के साथ गयी तो रुकी थी। पुरानी स्मृतियां एक बार फिर ताजा हो उठीं। उससे रहा नहीं गया और तस्वीर पर लाइक भेज दी। सबसे पहला लाइक उसी का था। उसके बाद शम्भू, फेस बुक पर जो भी तस्वीर अथवा अभिव्यक्ति डालता उसका लाइक अवश्य आता।
अब एक वर्ष बीत चुका था। आज फैमिली कोर्ट में सुनवाई की तारीख थी मगर वो कोर्ट नहीं आई न ही उसका कोई प्रतिनिधि। कोर्ट से लौटते ही शम्भू ने फेस बुक पर मेसेज डाल दिया, 'तारीख पर तुम कोर्ट नहीं आई? ऐसे केस लम्बा खिंच जायेगा । कम से कम इसी बहाने मिल भी लेते।'
मैसेज का उत्तर आने में देर नहीं लगी - 'मिलना था तो घर आ जाते। कल शाम उसी रेस्तरां में आ जाना, मिल लेते हैं । '
फेस बुक ने एक बार फिर से जोड़ दिया।
एस० डी० तिवारी
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