शनि की साढ़ेसाती
पूजा समाप्त हुई। कई लोग पंडित जी को अपना अपना हाथ दिखाने लगे।
'जीजा जी आप भी दिखा लो' लल्लन बोला। विभूति नारायण दूर से ही सब देख रहे थे, पंडित जी किस प्रकार से सबको चला रहे हैं। मजे लेने के ध्येय से वे पंडित जी के पास पहुँच गए। 'देखिये पंडित जी ' अपना दायां हाथ उनकी ओर बढ़ा दिया।
पंडित जी ने बताया, 'आप एक बार बहुत बीमार पड़े थे !'
'हाँ'
'मात्र इक्कीस सौ रुपये का।'
इसी तरह पंडित जी किसी को मोती, किसी को मोंगा तो किसी को पन्ना, नीलम आदि बता रहे थे। तभी भीतर से एक महिला घूँघट काढ़े आयी और पल्लू से अपना थोड़ा सा हाथ निकाल कर सामने कर दिया, ''पंडित जी !हमारे हाथ में पुत्र का योग कब तक है ?'
पंडित जी ने पूछा 'ये कौन है ?'
एक अन्य महिला ने उत्तर दे दिया कि एक रिश्तेदारी से आयी है।
पंडित जी ने बताया, 'शीघ्र ही पुत्र रत्न प्राप्त होगा, आप पुखराज धारण करें।'
जब अधेड़ उम्र की महिला ने घूँघट उठाया तो सब हंस पड़े। पंडित जी थोड़ा नाराज मगर दृढ़ होकर बोले, पहन कर तो देखो!
एस० डी० तिवारी
पूजा समाप्त हुई। कई लोग पंडित जी को अपना अपना हाथ दिखाने लगे।
'जीजा जी आप भी दिखा लो' लल्लन बोला। विभूति नारायण दूर से ही सब देख रहे थे, पंडित जी किस प्रकार से सबको चला रहे हैं। मजे लेने के ध्येय से वे पंडित जी के पास पहुँच गए। 'देखिये पंडित जी ' अपना दायां हाथ उनकी ओर बढ़ा दिया।
पंडित जी ने बताया, 'आप एक बार बहुत बीमार पड़े थे !'
'हाँ'
पंडित जी ने फिर पूछा 'आपके कितने बच्चे है? 'एक.... नहीं, दो ...ऊहूं, तीन?' थोड़ा रूक गए। पंडित जी असमंजस में पड़े विभूति नारायण की ओर देख रहे थे, जिस संख्या पर ये हां बोलें, उसीकी पुष्टि कर दें। पर विभूति नारायण इस बार मौन ही रहे तो पंडित जी ने अंततः बोला 'दो'।
'नहीं पंडित जी! अभी एक ही है। ' विभूति जी ने बताया।
'आपके ऊपर तो शनि की महादशा दशा चल रही है और साढ़ेसाती का योग बन रहा है। वैसे आप का भाग्य प्रबल है, शीघ्र ही जमीन जायदाद का लाभ मिलने वाला है। बस यही शनि थोड़ी रूकावट डाल रहा है।'
विभूति जी कुछ संशय में तो पड़े कि पंडित जी ने बिना कुंडली के ही शनि की महादशा कैसे बता दिया, पर थोड़ा डरते हुए कि पंडित जी कोई बड़े खर्च वाला पूजा वगैरह बता देंगे, विभूति नारायण ने पूछा , 'कोई उपाय भी तो होगा पंडित जी! '
पंडित जी ने तुरंत अपनी झोली से रत्नों से भरी छोटी सी एक पोटली निकाला । 'मेरे पास ये रत्न है, अंगूठी में जड़वा कर पहनने से लाभ मिलेगा।'
'कितने का है पंडित जी ?''मात्र इक्कीस सौ रुपये का।'
इसी तरह पंडित जी किसी को मोती, किसी को मोंगा तो किसी को पन्ना, नीलम आदि बता रहे थे। तभी भीतर से एक महिला घूँघट काढ़े आयी और पल्लू से अपना थोड़ा सा हाथ निकाल कर सामने कर दिया, ''पंडित जी !हमारे हाथ में पुत्र का योग कब तक है ?'
पंडित जी ने पूछा 'ये कौन है ?'
एक अन्य महिला ने उत्तर दे दिया कि एक रिश्तेदारी से आयी है।
पंडित जी ने बताया, 'शीघ्र ही पुत्र रत्न प्राप्त होगा, आप पुखराज धारण करें।'
जब अधेड़ उम्र की महिला ने घूँघट उठाया तो सब हंस पड़े। पंडित जी थोड़ा नाराज मगर दृढ़ होकर बोले, पहन कर तो देखो!
एस० डी० तिवारी
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