मैट्रिमोनियल
सौम्या ने अख़बार में पढ़ा 'बधू चाहिए'। लड़का उसी की जाति का है, उसका कनाडा में अपना कारोबार है। अब वह अनिवासी भारतीय है तथा उसे कनाडा की नागरिकता मिल चुकी है। सौम्या के मन में विदेश जाने की ललक पहलुए से ही थी, उसे लगा कि विदेश जाने का इससे अच्छा अवसर कहाँ मिलेगा। उसने, अख़बार का वह पृष्ठ खोलकर, मेज पर इस ढंग से रख दिया कि उसके पापा की दृष्टि उस पर पड़े। इस बात को सीधे पापा से कहने में उसे संकोच हो रहा था।
अख़बार रखकर वह निर्मला के यहाँ चली गयी। निर्मला उसकी घनिष्ठ सहेली थी। सौम्य ने उससे इस बात की चर्चा की तो निर्मला ने सलाह दिया, 'किस्मत आजमाने में क्या जाता है। यदि लड़का विदेश में है तो बड़ी अच्छी बात है। सुना है तुझे लोगों की आमदनी बहुत अधिक होती है, लोग ऐश की जिंदगी जीते हैं। और तू जाएगी तो हमें भी घूमने को मिलेगा।'
'हां, पहले तू घूमकर आ जा, तब आगे की बात करते हैं। उसके बारे में ठीक से पता कर लियो। जब तू ठीक कहेगी तभी आगे की बात करेंगे। '
दोनों जोर के ठहाके लगाकर, हंसने लगती हैं।
निर्मला फिर बोली, 'सही कह रही है, इस तरह के मैट्रिमोनियल में कई बार धोखा भी हो जाता है। भाई ठीक से जाँच परख के ही कोई कदम उठाना।'
सौम्या जब लौटकर आई तो उसके पापा अखबार लेकर ही बैठे थे। उसकी युक्ति काम कर गयी थी। वे वही पृष्ठ पढ़ रहे थे जिसे वह पढ़ाना चाहती थी। घर में घुसते ही उसके पापा बोले,
'बेटा सौम्य! देखो मैट्रिमोनियल में एक विज्ञापन आया है, सब ठीक ठाक तो लग रहा है। लड़का यहीं अपने पंजाब का रहनेवाला है, कनाडा का नागरिक हो चुका है, अच्छी आमदनी है।'
'पापा, जो आप लोग ठीक समझें।'
इतने में सौम्या की माँ भी आ जाती है। सौम्या के पापा अख़बार उसकी और बढ़ाते हैं, 'देखो सुकेशी, यह सौम्य के लायक अच्छा मैच लग रहा है। '
सुकेशी अख़बार ले लेती है, और पढ़कर, अपनी आशंकाओं से अवगत कराती है, 'लड़का विदेश में हैं, न जाना न सुना, पता नहीं कैसा होगा, उसका चाल चलन, उसकी आदतें, नशेड़ी है, जुआरी है।'
'अरे नहीं, लुधियाना के पास का ही रहने वाला है, उसके पिंड से पता करवा लेंगे।'
मेहरा जी ने उसके गांव से पता लगवाया तो पता चला कि रोहन के पिता पंजाब मूल के थे। वे एक अच्छे व्यक्ति थे। पहले लुधियाना में एक दुकान किये। पर बाद में कनाडा चले गए। रोहन का जन्म वहीँ हुआ था। वह क्या करता है, यह किसी को नहीं पता।
अख़बार रखकर वह निर्मला के यहाँ चली गयी। निर्मला उसकी घनिष्ठ सहेली थी। सौम्य ने उससे इस बात की चर्चा की तो निर्मला ने सलाह दिया, 'किस्मत आजमाने में क्या जाता है। यदि लड़का विदेश में है तो बड़ी अच्छी बात है। सुना है तुझे लोगों की आमदनी बहुत अधिक होती है, लोग ऐश की जिंदगी जीते हैं। और तू जाएगी तो हमें भी घूमने को मिलेगा।'
'हां, पहले तू घूमकर आ जा, तब आगे की बात करते हैं। उसके बारे में ठीक से पता कर लियो। जब तू ठीक कहेगी तभी आगे की बात करेंगे। '
दोनों जोर के ठहाके लगाकर, हंसने लगती हैं।
निर्मला फिर बोली, 'सही कह रही है, इस तरह के मैट्रिमोनियल में कई बार धोखा भी हो जाता है। भाई ठीक से जाँच परख के ही कोई कदम उठाना।'
सौम्या जब लौटकर आई तो उसके पापा अखबार लेकर ही बैठे थे। उसकी युक्ति काम कर गयी थी। वे वही पृष्ठ पढ़ रहे थे जिसे वह पढ़ाना चाहती थी। घर में घुसते ही उसके पापा बोले,
'बेटा सौम्य! देखो मैट्रिमोनियल में एक विज्ञापन आया है, सब ठीक ठाक तो लग रहा है। लड़का यहीं अपने पंजाब का रहनेवाला है, कनाडा का नागरिक हो चुका है, अच्छी आमदनी है।'
'पापा, जो आप लोग ठीक समझें।'
इतने में सौम्या की माँ भी आ जाती है। सौम्या के पापा अख़बार उसकी और बढ़ाते हैं, 'देखो सुकेशी, यह सौम्य के लायक अच्छा मैच लग रहा है। '
सुकेशी अख़बार ले लेती है, और पढ़कर, अपनी आशंकाओं से अवगत कराती है, 'लड़का विदेश में हैं, न जाना न सुना, पता नहीं कैसा होगा, उसका चाल चलन, उसकी आदतें, नशेड़ी है, जुआरी है।'
'अरे नहीं, लुधियाना के पास का ही रहने वाला है, उसके पिंड से पता करवा लेंगे।'
मेहरा जी ने उसके गांव से पता लगवाया तो पता चला कि रोहन के पिता पंजाब मूल के थे। वे एक अच्छे व्यक्ति थे। पहले लुधियाना में एक दुकान किये। पर बाद में कनाडा चले गए। रोहन का जन्म वहीँ हुआ था। वह क्या करता है, यह किसी को नहीं पता।
काफी सोच विचार कर मेहरा जी ने सौम्या का विवरण भेज दिया। मेहरा जी की वित्तीय स्थति बहुत अच्छी नहीं थी। उन्होंने सोचा कि यह रिश्ता तय हो जाता है तो वे बिना दान दहेज़ की शादी कर लेंगे और सौम्या सीधे कनाडा जाएगी। मेहरा जी को यह पता था कि अमेरिका और कनाडा में नागरिक अधिकार अपने यहाँ से अधिक मजबूत हैं। वैसे भी सौम्या पढ़ी लिखी है ही, हर स्थिति से निपटना जानती है।
काफी विचार मंथन कर, सौम्या का विवरण और फोटो भेज दिया गया और बहुत अधिक समय लगे बिना वहां से स्वीकृति भी आ गयी। अब फेस बुक पर चैटिंग और फोन से वार्तालाप भी शुरू हो गयी। सौम्या रोहन से काफी प्रभावित थी। शादी का दिन पक्का हुआ। रोहन इंडिया आया और अपने कुछ रिश्तेदारों व मित्र आदि को एकत्र किया। सौम्या से उसकी शादी हो गयी। विवाह के पंजीकरण के बाद दोनों कनाडा चले गये। सौम्या के पति के कनाडा का नागरिक होने के कारण उसे भी वहां की नागरिकता मिल गयी।
कनाडा में जाकर सौम्या को तो लगा कि वह स्वर्ग में ही आ गयी है। साफ सुथरी जगह, बड़ा सा घर, गाड़ी, व्यवस्थित जीवन, सब कुछ उसकी सोच से ज्यादा। एक वर्ष कैसे निकल गया, पता ही नहीं चला। घूमना फिरना, रेस्तरां में खाना उसे बहुत अच्छा लगता। एक साधारण परिवार की होने के कारण, उसे पैसे काम मिलते और इन सबके लिए कई बार मन मरना पड़ता। सौम्या दिन में अकेले बोर होती, एकाध बार तो अपनी मां से बात कर लेती, बाकी समय या तो टेलीविजन देखती या सोती । उसने सोचा कि वह इंग्लिश ऑनर्स है, क्यों न कोई जॉब ढूंढ ले। जब उसने यह बात रोहन से कही, तो वह साफ मना कर दिया।
धीरे धीरे दोनों की शादी को एक वर्ष बीत गए। सौम्या जब भी जाब की बात करती, पता नहीं क्यों रोहन उसे मना कर देता। एक दिन सौम्या के लिए एक कागज का टुकड़ा क़यामत लेकर आया, वह था कोर्ट का नोटिस।
धीरे धीरे दोनों की शादी को एक वर्ष बीत गए। सौम्या जब भी जाब की बात करती, पता नहीं क्यों रोहन उसे मना कर देता। एक दिन सौम्या के लिए एक कागज का टुकड़ा क़यामत लेकर आया, वह था कोर्ट का नोटिस।
रोहन ने कोर्ट में सौम्या से तलाक की याचिका डाल दी थी। अब तो सौम्या के पांव के नीचे से जमीन खिसक गयी। वह परदेश में क्या करेगी, कैसे रहेगी? या फिर वापस इंडिया? रोहन के इस आचरण से वह हत प्रभ थी। विदेश में उसकी कोई मदद करने वाला भी नहीं। ऐसा भी हो सकता है, वह कभी सोच भी नहीं सकती थी। फिर भी वह हिम्मत वाली लड़की थी, उसने सोचा अभी वह अपने मम्मी पापा को नहीं बताएगी और परिस्थिति से लड़ेगी। अंग्रेजी बोलने में उसे समस्या नहीं थी और उसने एकाध मित्र भी बना लिया था। अब तो वह रात दिन एक करके जॉब ढूंढने लगी और तीन दिन बाद ही उसे एक जॉब मिल गयी। उसने ठान लिया कि चाहे कुछ हो जाये, वह अपने पांव वहां जमा के रहेगी।
एक दिन, एक शॉपिंग माल में उसकी मुलाकात एक और भारतीय लड़की नीलम से हुई। बात चीत से पता चला की नीलम भी रोहन की भूतपूर्व पत्नी थी, जिसे वह तलाक दे चुका था। रोहन यही काम करता था इंडिया से शादी करके लड़की ले जाता और वहां जाकर तलाक दे देता। उसे नई नई लड़कियों के साथ समय बिताने का शौक था। सौम्या को इस बात की तनिक भी भनक नहीं थी कि वह उसकी तीसरी पत्नी है। नीलम से उसकी मित्रता हो गयी और उसके घर आना जाना शुरू हो गया। इधर कोर्ट से नोटिस के उत्तर में सौम्या जज के सामने पेश होकर बोल दी रोहन जीवन भर साथ देने का भरोसा देकर शादी किया। यह तलाक तो उसके साथ सरासर धोखा है। रोहन ने उसे कोई काम भी नहीं करने दिया। वह कनाडा के लिए नई है और तुरंत कुछ करने में सक्षम नहीं है, अतः उसे रोहन से मुआवजा दिलाया जाय। कोर्ट ने तलाक तो मंजूर कर लिया, मगर उसके जीवन यापन हेतु, रोहन को दो लाख डॉलर देने का आदेश दे दिया।
नीलम का भाई एक कंपनी में बड़ा अधिकारी था। उससे पता चला कि उसकी कंपनी में सौम्या के प्रोफाइल की जॉब निकली है। सौम्या का वहां पर चयन हो गया और उसने कंपनी बदल ली । अब सौम्या की परेशानी समाप्त हो चुकी थी। वह अपने नाम के अनुकूल ही सौम्य स्वाभाव की थी। नीलम के भाई कार्तिक को वह बहुत अच्छी लगती थी और उससे प्यार हो गया। दोनों ने विवाह कर लिया।
नीलम का भाई एक कंपनी में बड़ा अधिकारी था। उससे पता चला कि उसकी कंपनी में सौम्या के प्रोफाइल की जॉब निकली है। सौम्या का वहां पर चयन हो गया और उसने कंपनी बदल ली । अब सौम्या की परेशानी समाप्त हो चुकी थी। वह अपने नाम के अनुकूल ही सौम्य स्वाभाव की थी। नीलम के भाई कार्तिक को वह बहुत अच्छी लगती थी और उससे प्यार हो गया। दोनों ने विवाह कर लिया।
उधर रोहन ने बिना सोचे समझे तलाक का कदम उठा तो लिया पर उसे सौम्या का व्यव्हार इतना पसंद था कि उसके लिए दिन रात तड़पता था। पर अब वह क्या कर सकता था, उसका भण्डा फूट चुका था। सौम्या और नीलम ने ठान लिया कि वे रोहन को, और किसी लड़की को उसके जाल में नहीं फंसने देंगी। अब रोहन को अकेले ही रहना था। वह अपने किये पर पछताने के अलावा कर भी क्या सकता था।
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