राहें और भी हैं
साहिल, अमेरिका जाने का अरमान लिए जी जान से जुटा था। पढ़ाई में वह बहुत तेज था और अपनी स्नातक की डिग्री अव्वल दर्जे से पास कर लिया था। उसने अमेरिका जाने के बारे जानकारी प्राप्त कर लिया था। उसे यह पता था कि सीधे नौकरी के लिए वहां जाना मुश्किल है, हाँ आगे की पढ़ाई के लिए जाया जा सकता है और उसके बाद वहां काम ढूंढ कर बसा जा सकता है। उसने टोफेल और जीआरई की तैयारी की और उसमें भी अच्छा स्कोर प्राप्त कर लिया। वाशिंगटन की एक यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया, वहां से उसके एडमिशन की स्वीकृति आ गयी। अब उसे अमेरिका जाने का वीसा लेना था। उसने अमेरिकी दूतावास में वीसा के लिये आवेदन लगा दिया और उसके साथ अपने सारे प्रमाणपत्र जमा कर दिए। दूतावास में उसे साक्षात्कार के लिए बुलाया गया।
कॉउंसलर ने उससे अनेकों प्रश्न पूछे -
'अमेरिका में ही क्यों पढ़ना चाहते हो ?'
'क्योंकि वहां पढ़ाई और रोजगार की अच्छी व्यवस्था है। '
'राहें और भी हैं, यह अंत नहीं, शुरुआत है। एक रास्ता बंद होता है तो समझो कई और रास्ते खुल जाते हैं। इण्डिया में अमेरिका से भी अच्छी यूनिवर्सिटी हैं। तुम यहीं आगे की पढ़ाई करो, जितना पढोगे, उतना पढ़ाऊंगा, ओवरटाइम करूँगा। तुम्हें हार नहीं माननी है, कुछ करके दिखाना है। '
अब साहिल वीसा के रद्द होने के गम को भूल चुका था। उसने एल० एल० बी० में दाखिला ले लिया। वहां भी अपने हुनर का परिचय दिया और तीन साल में वकील बनकर निकला। बस इतने से वह संतुष्ट नहीं था। अब तो उसने ठान लिया था कुछ करके ही दम लेगा। उसने प्रादेशिक सेवा का फॉर्म भरा, मगर एक बार फिर से किस्मत ने साथ नहीं दिया, वह फेल हो गया। निराश साहिल को अपने पिता की बात याद थी 'एक रास्ता बंद होता है तो कई और रास्ते खुल जाते हैं। '
तभी उसके साथ पढ़े, एक मित्र का फोन आ जाता है 'साहिल, मुंसिफ मजिस्ट्रेट की जगह निकली है, चल अप्लाई करते हैं। इस बात ने साहिल की जान में जान डाल दी। अब देर किस बात की थी साहिल जी जान से जुट गया और अपनी पूरी ताकत झोंक दी। इस बार अल्ला ने भी उसका साथ दिया और उसकी मेहनत रंग लाई। वह सफल हुआ और मुंसिफ मजिस्ट्रेट बन गया। कितनी बड़ी बात है। वह अब साहिल लोगों को न्याय देगा।
साहिल अल्ला का बहुत शुक्रगुजार है। अल्ला ने उससे, उसकी जमीन नहीं छीनी और एक नेक काम में लगा दिया। अगर उसे अमेरिका का वीसा मिल जाता, तो वह इस नेक काम से महरूम रह जाता। साहिल ने मन में ठान लिया, उसके पास जो भी आएगा, अन्याय नहीं होने देगा।
साहिल, अमेरिका जाने का अरमान लिए जी जान से जुटा था। पढ़ाई में वह बहुत तेज था और अपनी स्नातक की डिग्री अव्वल दर्जे से पास कर लिया था। उसने अमेरिका जाने के बारे जानकारी प्राप्त कर लिया था। उसे यह पता था कि सीधे नौकरी के लिए वहां जाना मुश्किल है, हाँ आगे की पढ़ाई के लिए जाया जा सकता है और उसके बाद वहां काम ढूंढ कर बसा जा सकता है। उसने टोफेल और जीआरई की तैयारी की और उसमें भी अच्छा स्कोर प्राप्त कर लिया। वाशिंगटन की एक यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया, वहां से उसके एडमिशन की स्वीकृति आ गयी। अब उसे अमेरिका जाने का वीसा लेना था। उसने अमेरिकी दूतावास में वीसा के लिये आवेदन लगा दिया और उसके साथ अपने सारे प्रमाणपत्र जमा कर दिए। दूतावास में उसे साक्षात्कार के लिए बुलाया गया।
कॉउंसलर ने उससे अनेकों प्रश्न पूछे -
'अमेरिका में ही क्यों पढ़ना चाहते हो ?'
'क्योंकि वहां पढ़ाई और रोजगार की अच्छी व्यवस्था है। '
'अगर पढ़ाई के बाद वहां जॉब नहीं मिली तो क्या करोगे ?'
'वापस आ जाऊंगा। '
'वहां तुम्हारे रहने की क्या व्यवस्था है ?'
'यूनिवर्सिटी से हॉस्टल के लिए रिक्वेस्ट करूंगा। '
'तुम्हारे पिता क्या काम करते हैं ?'
'एक निजी कंपनी में नौकरी। '
'तुम्हारा बैंक स्टेटमेंट और संपत्ति का ब्यौरा देख कर तो लगता है तुम वहां का खर्च नहीं उठा सकते। '
'हां, कुछ पार्ट टाइम काम कर लूंगा। '
'तुम जाकर हमारे देश पर बोझ बन जाओगे। ऐसे लोगों को वीसा नहीं दिया जा सकता। तुम्हारा आवेदन रद्द किया जाता है। '
यह सुनते ही साहिल के अरमानों पर पानी फिर गया। वह मुंह बनाकर घर वापस आ गया। उसे मायूस देखकर पूरे घर में उदासी छा गयी। उसके पिता मोहसिन समझदार व्यक्ति थे। वे साहिल को पढ़ने और कुछ बनने के लिए हमेशा प्रेरित करते रहते थे। वीसा रद्द होने का मलाल तो उनको भी था, मगर इसकी झलक अपने चेहरे पर नहीं आने दिया। साहिल कई दिनों से उदास था। उसे लग रहा था अमेरिका जाने का सपना कभी भी पूरा नहीं हो पायेगा और इस तरह से उसका परिवार कभी भी गरीबी से नहीं उबर पायेगा। मेरे पिता के पास कम संपत्ति होने के कारण अमेरिका का वीसा रद्द हो गया। बेटे को उदास देख मोहसिन ने उसके सिर पर हाथ रखा और बोला -'राहें और भी हैं, यह अंत नहीं, शुरुआत है। एक रास्ता बंद होता है तो समझो कई और रास्ते खुल जाते हैं। इण्डिया में अमेरिका से भी अच्छी यूनिवर्सिटी हैं। तुम यहीं आगे की पढ़ाई करो, जितना पढोगे, उतना पढ़ाऊंगा, ओवरटाइम करूँगा। तुम्हें हार नहीं माननी है, कुछ करके दिखाना है। '
अब साहिल वीसा के रद्द होने के गम को भूल चुका था। उसने एल० एल० बी० में दाखिला ले लिया। वहां भी अपने हुनर का परिचय दिया और तीन साल में वकील बनकर निकला। बस इतने से वह संतुष्ट नहीं था। अब तो उसने ठान लिया था कुछ करके ही दम लेगा। उसने प्रादेशिक सेवा का फॉर्म भरा, मगर एक बार फिर से किस्मत ने साथ नहीं दिया, वह फेल हो गया। निराश साहिल को अपने पिता की बात याद थी 'एक रास्ता बंद होता है तो कई और रास्ते खुल जाते हैं। '
तभी उसके साथ पढ़े, एक मित्र का फोन आ जाता है 'साहिल, मुंसिफ मजिस्ट्रेट की जगह निकली है, चल अप्लाई करते हैं। इस बात ने साहिल की जान में जान डाल दी। अब देर किस बात की थी साहिल जी जान से जुट गया और अपनी पूरी ताकत झोंक दी। इस बार अल्ला ने भी उसका साथ दिया और उसकी मेहनत रंग लाई। वह सफल हुआ और मुंसिफ मजिस्ट्रेट बन गया। कितनी बड़ी बात है। वह अब साहिल लोगों को न्याय देगा।
साहिल अल्ला का बहुत शुक्रगुजार है। अल्ला ने उससे, उसकी जमीन नहीं छीनी और एक नेक काम में लगा दिया। अगर उसे अमेरिका का वीसा मिल जाता, तो वह इस नेक काम से महरूम रह जाता। साहिल ने मन में ठान लिया, उसके पास जो भी आएगा, अन्याय नहीं होने देगा।
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