पानी में पैसा
चौधरी साहब बाथरूम से नहाकर, पूरे एक घंटे बाद निकले।
'वाह! नहा कर आनंद आ गया। आज बड़े दिनों बाद इत्मीनान से नहाने का मौका मिला। छुट्टी के दिन भी कभी ये काम तो कभी वो काम, कभी फोन। लोग चैन नहीं लेने देते। जबसे बना है, बाथ रूम का असली मजा आज मिला।' आकर वे सोफे पर बैठ जाते हैं।
'देवी जी, खाना लगा दो, अब खा भी लेते हैं। '
'अभी खाना बना कहाँ! बेटे बहू घूमने गए हैं, आज मरी खाना बनाने वाली भी नहीं आई। पता नहीं कहां मर गयी। अभी थोड़ी देर टी० वी० पर समाचार वगैरह देख लो। तब तक खिचड़ी बना देती हूँ। '
चौधरी साहब बाथरूम से नहाकर, पूरे एक घंटे बाद निकले।
'वाह! नहा कर आनंद आ गया। आज बड़े दिनों बाद इत्मीनान से नहाने का मौका मिला। छुट्टी के दिन भी कभी ये काम तो कभी वो काम, कभी फोन। लोग चैन नहीं लेने देते। जबसे बना है, बाथ रूम का असली मजा आज मिला।' आकर वे सोफे पर बैठ जाते हैं।
'देवी जी, खाना लगा दो, अब खा भी लेते हैं। '
'अभी खाना बना कहाँ! बेटे बहू घूमने गए हैं, आज मरी खाना बनाने वाली भी नहीं आई। पता नहीं कहां मर गयी। अभी थोड़ी देर टी० वी० पर समाचार वगैरह देख लो। तब तक खिचड़ी बना देती हूँ। '
चौधरी साहब का बिज़नेस कमाई वाला था। बेटे ने अपना अलग काम शुरू किया था, मगर चौधरी साहब के रुतबे का उसे भरपूर लाभ मिला और उसे भी अच्छी कमाई होने लगी थी। गाजियाबाद में आलीशान बंगला होने पर भी, बेटे को कई कमियां दिखती थीं। वह घर में तरण ताल भी चाहता था पर स्थान कम होने के कारण अच्छा स्विमिंग पूल नहीं बन सकता था मगर बाथरूम तो आधुनिक सुविधाओं से युक्त हो ही सकता था। एक आर्किटेक्ट को बुलवाकर बाथरूम की डिज़ाइन तैयार करवाई। घर के कई जगह के पत्थर टूटे और दुबारा लगे। परन्तु पूरे परिवार का सारा फोकस बाथरूम पर था। १२ फुट लम्बे १२ फुट चौड़े मुख्य बाथरूम में हर दीवार पर दो दो बड़े फव्वारे लगाए गए, ठंडा गरम दोनों तरह के पानी की व्यवस्था की गयी। दिवार और फर्श के लिए इम्पोर्टेड टाइल मंगाई गयी। इसके अलावा बाथरूम की और सभी आधुनिक फिटिंग्स। उसमें रखी एक विशेष पहिये वाली कुर्सी, जिसपर बैठ कर चारों ओर घूम घूम कर नृत्य करते हुए नहा लो। स्पीकर और माइक, ताकि नहाने में देर हो रही हो तो सन्देश का आदान प्रदान हो सके। चौधरी साहब के बाथरूम में नहाना तो जैसे इंद्रासन में नहाना। बीचों बीच स्टूल या कुर्सी पर बैठ जाओ, आठ फव्वारे एक साथ खोल दो, फिर इंद्र भगवान द्वारा की गयी बरसात का, भरपूर आनंद। किसी राजा महाराजा को भी बाथरूम में नहाने का यह ठाट नहीं मिला होगा। वैसे चौधरी साहब और उनके बेटे कभी बारिश में भीगे नहीं होंगे। हाँ उनका बेटा महंगे स्कूल में पढ़ा था, कभी कभी स्विमिंग पूल जाता था।
चौधरी साहब के यहाँ, उनके कोई मित्र या रिश्तेदार आते तो उनके घर की बड़ी प्रशंसा करते, सुनकर वे गद्गद हो जाते। चौधरी साहब को अलग से बताना पड़ता, बाथरूम में ही ८० लाख लगा हुआ है । सुनने वाले को कहना ही पड़ता, अवश्य लगा होगा; सबके वश की बात कहां, पैसे भी तो चाहिए।
चौधरी साहब और उनका बेटा, दोनों ही अपने काम में इतना व्यस्त रहते थे, कि वही चिड़िया वाला स्नान करके, हल्का फुल्का नाश्ता, चाहे किया या वो भी नहीं; भागना पड़ता था। उन्हें बाथरूम बनवाने का जितना शौक था, इत्मीनान से नहाने का अवसर नहीं मिल पाता। चौधरी साहब ने इतना पैसा लगाया था, इसलिए उनकी पत्नी साफ सफाई का पूरा ध्यान रखतीं । एक एक चीज ध्यान से देखकर, कामवाली से साफ़ करवाती थीं। कहीं कोई गन्दगी रह गयी तो चौधरी साहब ८० लाख दिखाने लगेंगे। चौधरी साहब को बाथरूम में नहाने से अधिक उसका बखान करने और मित्रों को दिखाने में अधिक आनंद मिला।
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